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  • Aabhushan Times

आने वाला है ज्वेलरी की बिक्री का सीजनलंबे वक्त के बाद बाजार में खरीदी खुलने के आसार

भारत में चुनाव संपन्न हो गए हैं, आचार संहिता हट गई है, नकदी की आवाजाही चालू हो गई है, बाजारों में खुलापन आ गया है और ज्वेलर्स के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी यह है कि देश में ज्वेलरी की सीजन शुरू होने वाली है। बारिश के उतरते ही भारत में कुछ मुख्य त्यौहारों की शुरूआत हो जाती है और इन्हीं मौकों के साथ ज्वेलरी खरीदी की बाढ़ सी आती है, जिनमें लोग आमतौर पर अवसरों के हिसाब से ज्वेलरी की खरीदारी करते हैं। विवाह सीजन इस बार बेहद खराब गया क्योंकि विवाह के आयोजन भी हुए ही नहीं तथा हुए तो भी बेहद कम संख्या में। अत: ज्वेलरी की सेल बेहद कम हुई, मगर अब ज्वेलर्स को उन्मीद है कि बारिश के बीच से ज्वेलरी की सेल शुरू होगी, जो दीपावली के बाद तक लगातार चलेगी। खास बात यह है कि भारत से ज्वेलरी एक्सपोर्ट भी बढ़ेगा। सरकारी आंकडों के मुताबिक ज्वेलरी एक्सपोर्ट के मामले में भारत लगातार बेहतरीन काम कर रहा है तथा आने वाले वर्षों में इसके और ज्यादा तेजी पकडऩे के आसार हैं। क्योंकि वर्ष 2023 तक के आंकड़े देखें, तो भारत कट और पॉलिश्ड डायमंड के शीर्ष निर्यातकों में पहले स्थान पर है, और गोल्ड व सिल्वर ज्वेलरी और लैब ग्रेन डायमंड के मामले में संसार में दूसरे स्थान पर है। इसी से समझा जा सकता है कि भारतीय ज्वेलरी उद्योग में आने वाले दिनों में तेजी आने के आसार साफ हैं।  

देश में बारिश का सीजन शुरू होते ही ज्वेलरी का निर्माण बढ़ जाता है। क्योंकि इन दिनों में ही जो ज्वेलरी बनती है, वही आने वाले त्यौहारों में आगे बिकती है। बारिश के साथ ही रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, फिर नवरात्री, दीपावली आदि इन त्योहारों के समय, ज्वेलरी की सेल बढ़ जाती है, और इसके कारण बाजार में ज्वेलरी सेल की सीजन आती है, जिसके परिणामस्वरूप ज्वेलरी दुकानें विशेष छूट और ऑफर्स भी प्रदान करती हैं ताकि लोग अपनी पसंदीदा ज्वेलरी को खरीद सकें। तो, यही सीजन है बाजार में गोल्ड की सेल का, क्योंकि गोल्ड खरीदकर ही तो ज्वेलरी बनेगी और बाजार में बिकेगी। हालांकि हाल ही में देखी गई गोल्ड की कीमतों में रिकॉर्ड तेजी ने फिलहाल ज्वेलरी की डिमांड को कम कर दिया है, क्योंकि उतार - चढ़ाव वाले बाजार में कोई भी उपभोक्ता हाथ डालने से बचता है। इसी कारण इस साल की दूसरी तिमाही यानी अप्रैल से जून महीने के बीच ज्वेलरी इंडस्ट्री का बाजार बेहद ठंडा रहा। फिर देश में आम चुनाव होने की वजह से अप्रेल महीने से ही आचार संहिता लग गई, जिसकी वजह से देश भर में कैश की आवाजाही बिल्कुल ठप हो गई, तो ज्वेलरी की खरीदी भी लगभग बंद सी हो गई। देश भर के ज्वेलरी शो रूम्स में ग्राहक बेहद कम ही दिखे और कमाई कम तथा खर्चे ज्यादा होने की वजह से ज्वेलर्स भी बेहद परेशान रहे। हालांकि, उससे पहले इस साल यानी 2024 की पहली तिमाही में मुंबई, पुणे, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, बैंगलुरू, त्रिवेंद्रम, राजकोट, अहमदाबाद, सूरत, जयपुर, जोधपुर, लखनऊ, भोपाल, पटना आदि देश भर के बाजारों में ज्वेलरी सेल का प्रदर्शन काफी ठीक रहा था।

इस साल की पहली तिमाही में ज्वेलरी की सेल काफी संतोषजनक रही थी, क्योंकि गोल्ड के रेट्स लगातार बढ़त की तरफ अग्रसर थे। भले ही यही माना जाता रहा है कि गोल्ड के रेट बढऩे से लोग सहम जाते हैं, लेकिन ज्वेलरी की सेल में इस दौर में वास्तव में थोड़ी सी तेजी आई, क्योंकि जब जब गोल्ड के रेट बढ़ते हैं, तभी सेल बढ़ती है। इसका कारण केवल एक ही माना जाता है कि सामान्य ग्राहक सोचता है कि गोल्ड के रेट कही और न बढ़ जाएं, इसलिए वह तत्काल खरीदी की रेस में उतरता है। जबकि गोल्ड जैस, जैसे नीचे उतरने लगता है, तो ज्वेलरी की सेल बेहद कम हो जाती है या फिर थम सी जाती है क्योंकि लोग सोचते हैं कि अभी तो गोल्ड और नीचे उतर सकता है। मगर, अब यानी इस साल की तीसरी तिमाही के बाद ज्वेलरी की सेल फिर से ढऩे के आसार पक्के माने जा रहे हैं। क्योंकि आने वाले दिनों में कई त्योहार, उत्सव व अवसर आने वाले हैं। दीपावली से लेकर विवाह का सीजन भी आने वाला है। अत: ज्वेलर्स अभी से अपने शोरूम्स में नई नई ज्वेलरी भरने की तैयारी कर रहे हैं।

वैसे माना जाता है कि उत्सव और विवाह के सीजन के मौके पर भी ज्वेलरी की खरीदारी गोल्ड के रेट्स पर निर्भर करती है, मगर फिर भी ज्वेलरी जरूर बिकती है क्योंकि बमारे देश में तो आखिर बिना ज्वेलरी तो कोई भी विवाह या उत्सव मनाए ही नहीं जाते। इसी कारण, आने वाले सीजन में उपभाक्ताओं की जरूरतों व पसंद को देखते हुए देश भर के ज्वेलर्स ने गोल्ड ज्वेलरी सहित डायमंड ज्वेलरी और सिल्वर ज्वेलरी का निर्माण शुरू कर दिया है। हालांकि ज्यादातर ज्वल्रस मानते हैं कि इस साल चाहे ग्राहकी कितनी भी खुल जाए और ज्वेलरी कितनी भी बिक जाए, मगर अप्रेल से लेकर जून के बीच यानी दूसरी तिमाही में ज्वेलरी की सेल में आई 50 फीसदी की गिरावट की भरपाई नहीं कर सकते।  हालांकि, पिछले दो महीनों में, गोल्ड की कीमतें 10 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ी है और पिछले छह महीनों में गोल्ड 23 से 25 फीसदी महंगा हो गया है, इससे ज्वेलरी की रिटेल खरीद काफी हद तक प्रभावित हुई है। मगर, आने वाले दिनों में ज्वेलरी की सेल जबरदस्त बढ़ेगी, यह सभी को उम्मीद है।

ज्वेलरी भारतीय समाज के लिए महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। भारती समाज में ज्वेलरी न केवल सौंदर्य के प्रतीक के रूप में, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक संदर्भों सहित जीवन के भविष्य की ताकत के रूप में भी सदा सदा से इसका काफी ज्यादा महत्व है। ज्वेलरी के हर पहलू को देखें, तो किसी भी तरह की ज्वेलरी हर किसी के लिए न केवल एक ज्वेलरी होती है, बल्कि यह एक महिला के आत्म सम्मान, आत्म प्रतिष्ठा और भविष्य की सुरक्षा का साधन भी है। ज्वेलरी न केवल कोई डिजाइनर सजावटी सामान होता है, बल्कि यह समाज में स्त्री की मजबूत स्थिति को भी प्रकट करता है, तथा उसे गर्व भी अनुभव करवाता है। विशेषकर, शादियों और जन्म दिन के अवसरों से लेकर त्योहारों में महिलाओं के लिए ज्वेलरी का महत्व बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। भारतीय समाज की परंपराओं के मुताबिक ज्वेलरी को पीढ़ी दर पीढ़ी एक परंरागत संपत्ति के रूप में भी स्वीकार किया जाता है और यह पीढिय़ों के बीच की आपसी बंधन व रिश्तों की मजबूती को भी प्रकट करती है। इसीलिए भारत में विवाह, उत्सवों तथा मेलजोल के अवसरों पर ज्वेलरी खरीदने के परंपरा है और जीवन की सुरक्षित संपत्ति के लिहाज से जरूरत भी। इसी कारण माना जा रहा है कि इस बार ज्वेलरी की सीजन भले ही कुछ ठंडी रही, लेकिन अब उसमें उछाल आने की संभावना है।

ताजा माहौल में ज्वेलरी की बढ़ती मांग पर नजर डालें, तो अप्रैल 2023 से जनवरी 2024 के दौरान भारत का ज्वेलरी और जेम का निर्यात 26.35 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया। सन 2022 में, कट और पॉलिश किए गए डायमंड के मामले में भारत शीर्ष निर्यातकों में पहले स्थान पर है, और और गोल्ड से बननेवाली सिल्वर से निर्मित ज्वेलरी सहित लैब ग्रेन डायमंड के निर्यात के मामले में हमारा देश संसार में दूसरे स्थान पर है। जनवरी 2022 तक, भारत के गोल्ड व डायमंड के व्यापार ने भारत के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में बड़ा योगदान दिया। जेम एंड ज्वेलरी क्षेत्र में 50 लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है। भारत सरकार ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 'ब्रांड इंडियाÓ को बढ़ावा देने के लिए निवेश को बढ़ावा देने और प्रौद्योगिकी और कौशल को उन्नत करने के लिए कई उपाय किए हैं। सरकार ने स्वचालित मार्ग के तहत इस क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति दी है, जिसमें निवेश के लिए विदेशी निवेशक या भारतीय कंपनी को रिजर्व बैंक या भारत सरकार से किसी पूर्व अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है। भारत सरकार ने मार्च 2022 में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के साथ एक व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता भी किया, इससे भारतीय जेम एंड ज्वेलरी इंडस्ट्री को भारत से ज्वेलरी के निर्यात को और बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। आने वाले वर्षों में, ज्वेलरी क्षेत्र में वृद्धि से बड़े पैमाने पर बड़े रिटेल विक्रेताओं का विकास होगा। बाजार के स्थापित बड़े ब्रांड ज्वेलरी सेक्टर में संगठित बाजार का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और विकास के नए अवसर खोल रहे हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में ज्वेलरी की सेल बढऩे से ज्वेलरी निर्माण उद्योग को ताकत लेगी, बाजार में ग्राहकी बढ़ेगी और ज्वेलर के चेहरे चमकेंगे।


त्यौहार अक्सर ज्वेलरी की खरीदी का समय होते हैं, जब लोग अपनी धन का संचय करने और नए निवेश के लिए सोचते हैं, तो सबसे पहले दिमाग में ज्वेलरी खरीदने का विचार करते हैं। कुछ दिन बाद आने वाला वक्त भारत में ज्वेलरी बिक्री का सबसे महत्वपूर्ण समय है।






आजकल न केवल शादी - विवाह या जन्म दिन जैसे अवसरों पर, बल्कि जब भी जेब में अतिरिक्त पैसा आ जाए, तो भारत में  किसी भी समय लोग ज्वेलरी की खरीदी करते हैं, और इसे अपने धन में संचित करने और जीवन के भविष्य के इंतजाम के लिहाज से अच्छा मानते हैं।







ज्वेलरी मार्केट के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय ज्वेलरी की बिक्री के अवसर का होना  है, जो धार्मिक व सामाजिक महत्व के साथ आता है। लोग ऐसे अवसरों पर ज्वेलरी खरीदकर अपने धन को संचित करने का काम करते हैं, तभी तो बाजार में रौनक बढ़ती है।






ज्वेलरी की बिक्री ही इस उद्योग के विकास का केंद्र है। ज्वेलरी व्यवसायियों के लिए बिक्री का सीजन मुनाफा देने वाला होता है। ज्वेलरी डिज़ाइनर्स और ज्वेलरी मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों के लिए ज्वेलरी की बिक्री का यह सीजन कमाई करने का एक अच्छा मौका होता है।

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