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भारत-न्यूजीलैंड एफटीए जेईपीसी ने 3 वर्षों में निर्यात 200 प्रतिशत बढक़र 50 मिलियन डॉलर तक पहुंचने का जताया अनुमान

  • Aabhushan Times
  • Apr 27
  • 1 min read

मुंबई। जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल जीजेईपीसी ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच 27 अप्रैल 2026 को हस्ताक्षरित मुक्त व्यापार समझौते (स्नञ्ज्र) का स्वागत करते हुए इसे भारतीय निर्यातकों के लिए एक महत्वपूर्ण और समयोचित कदम बताया है। काउंसिल के अनुसार, वर्तमान में न्यूजीलैंड को भारत से रत्न एवं आभूषण निर्यात लगभग 16.61 मिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो इस समझौते के तहत प्राप्त शून्य शुल्क (जीरो-ड्यूटी) पहुंच के कारण अगले तीन वर्षों में बढक़र लगभग 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है। 


जीजेईपीसी ने कहा कि यह समझौता भारत को चीन और थाईलैंड जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले स्पष्ट शुल्क लाभ प्रदान करेगा, जिससे सोना, चांदी, प्लैटिनम और फैशन ज्वेलरी श्रेणियों में भारत की बाजार हिस्सेदारी मजबूत होने की संभावना है। काउंसिल ने यह भी उल्लेख किया कि न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के लोगों की मजबूत उपस्थिति और स्थानीय साझेदारियों के माध्यम से रिटेल नेटवर्क के विस्तार के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं, जो निर्यात वृद्धि को और गति देंगे।


जीजेईपीसी के अध्यक्ष किरिट भंसाली ने कहा, भारत-न्यूजीलैंड एफटीए अमेरिका और जीसीसी बाजारों से आगे निर्यात बाजारों के विविधीकरण में सहायक होगा। जीरो-ड्यूटी पहुंच के साथ निर्यात तीन वर्षों में 16.61 मिलियन डॉलर से बढक़र लगभग 50 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है, साथ ही चीन और थाईलैंड के मुकाबले प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त भी मिलेगी। काउंसिल ने आगे कहा कि न्यूजीलैंड के ज्वेलरी रिटेल क्षेत्र में हाल के वर्षों में भारतीय कंपनियों द्वारा किए गए बड़े निवेश इस बाजार की दीर्घकालिक संभावनाओं को दर्शाते हैं। एफटीए से न केवल निर्यात को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।












 
 
 

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