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रुपया स्थिर रहा, तो गोल्ड इसी साल 90 हजारसन 2030 तक गोल्ड 1 लाख 70 हजार के आसपास संभव

























गोल्ड की डिमांड लगातार बढ़ रही है, रेट्स भी चढ़ रहे हैं और तेजी से नीचे भी आ रहे हैं। मगर, गोल्ड भले ही दस फीसदी तक उतर जाए, लेकिन लंबे वक्त तक उसके सस्ता होने के आसार तो कतई नहीं है। वल्र्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट तो कह ही रही हैं, गोल्ड सेक्टर के जानकार भी कह रहे हैं कि दुनिया भर में जिस तरह के आर्थिक व राजनीतिक हालात बनते - बिगड़ते जा रहे हैं, उस हिसाब से तो सन 2030 तक गोल्ड 1 लाख 70 हजार के आसपास की उड़ान भी भर सकता है। गोल्ड सेक्टर के एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगले 4-5 सालों के लिए गोल्ड खरीदना एक बहुत ही बेहतरीन कदम हो सकता है। क्योंकि सन 2030 तक गोल्ड 1 लाख 68 हजार के पार तो जा ही सकता है। कोविड से पहले गोल्ड केवल 35 हजार के आसपास ट्रेंड कर रहा था, लेकिन केवल 4-5 साल में ही यह दो गुना से भी ज्यादा आगे बढ़ गया है, तो आने वाले 5 साल में गोल्ड 1 लाख 70 हजार के पास पहुंच जाए तो किसी को भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए। इसके साथ ही खास बात यह है कि रुपये की कीमतें अगर स्थिर रह जाती है तो इसी साल गोल्ड के रेट्स लगभग 90 हजार रुपये के पार भी पहुंच सकते हैं। इसकी सबसे अहम वजह केवल यही है कि गोल्ड ही दुनिया का सबसे सेफ निवेश है और दुनिया के सभी देशों की मुद्रा भंडारण को बैलेंस करने का काम केवल गोल्ड ही कर सकता है। अमेरिका सहित दुनिया के सभी देश लगातार गोल्ड की खरीद कर रहे हैं तथा चीन तो सबसे बड़ी भंडारण बना रहा है। इसी से अंदाज लगाया जा सकता है कि आने वाले वक्त में गोल्ड की कीमतें कहां तक पहुंचेंगी।


भारतीय अर्थव्यवस्था में ही नहीं, किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में गोल्ड अपना अलग-अलग तरह से योगदान करता है। किसी भी देश के अच्छे या खराब आर्थिक हालातों में या बनते बिगड़ते राजनीतिक हालात के दौरान गोल्ड में ही संभावित रूप से मजबूत निवेश मांग देखी जा सकती है। उदाहरण के लिए, युद्ध या राजनीतिक अशांति के समय हाजिर गोल्ड संभावित रूप से सबसे ज्यादा बढ़ता है। आर्थिक दृष्टिकोण से, शेयर बाजार में गिरावट या मंदी के बाजार में संभावित रूप से गोल्ड की खरीदारी बढ़ सकती है। ब्याज दरें और मौद्रिक नीति भी गोल्ड की हाजिर कीमत पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती हैं। अत्यंत निम्न ब्याज दरों की अवधि के दौरान गोल्ड ही संभावित रूप से लाभान्वित हो सकता है, क्योंकि कम दरें गोल्ड को रखने की अवसर लागत को कम कर देती हैं। दूसरी ओर, ब्याज दरें बढऩे से गोल्ड संभावित रूप से दबाव में आ सकता है, इस तथ्य के कारण कि गोल्ड अपने पास रखने के लिए कोई लाभांश या ब्याज नहीं देता है। मुद्रा बाजार गोल्ड की हाजिर कीमत का एक अन्य प्रमुख चालक है। हालाँकि गोल्ड का व्यापार पूरी दुनिया में किया जाता है, लेकिन इसे अक्सर डॉलर में दर्शाया जाता है। जैसे-जैसे डॉलर बढ़ता है, विदेशी खरीदारों के लिए गोल्ड अपेक्षाकृत अधिक महंगा बनाता है। दूसरी ओर, कमजोर डॉलर संभावित रूप से विदेशी निवेशकों के लिए गोल्ड की हाजिर कीमतें बढ़ सकता हैं।  


दुनिया भर में गोल्ड का व्यापार और उपयोग निवेश उद्देश्यों, ज्वेलरी बनाने और विनिमय के माध्यम के रूप में किया जाता है। क्योंकि वजन में गोल्ड के रेट्स एक समान है चाहे वह अमेरिका में हो या जापान में या फिर भारत में, सैद्धांतिक रूप से हर जगह गोल्ड की हाजिर कीमतें थोड़े बहुत फर्क के बावजूद लगभग एक समान ही होती है। बेशक, अलग-अलग मुद्रा मूल्यों का गोल्ड पर भी प्रभाव पड़ सकता है, और डीलर प्रीमियम भी भिन्न हो सकते हैं। गोल्ड की हाजिर कीमत का उपयोग करके, इसको किसी भी मुद्रा का उपयोग करके कहीं भी खरीदा जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि गोल्ड की हाजिर कीमत भारत में अगर 72 हजार डॉलर दस ग्राम है और आप जापान में गोल्ड खरीदना चाह रहे थे, तो आप जापानी येन का उपयोग करके गोल्ड खरीदने के लिए भारतीय रुपए का आवश्यक रूपांतरण करके खरीद सकते हैं।


गोल्ड का कारोबार पूरी दुनिया में होता है और इसलिए इसकी कीमत हमेशा बढ़ती रहती है। गोल्ड के व्यापार के कुछ प्रमुख केंद्रों में अमेरिका, इंग्लैंड, ज्यूरिख, भारत और चीन सहित बहुत कुछ शामिल हैं। हाजिर गोल्ड का बाजार अनिवार्य रूप से हमेशा खुला रहता है। इस साल, यानी 2023 की जब शुरुआत हुई थी, तो गोल्ड की कीमतें 56 हजार रुपये प्रति दस ग्राम थी, जो साल के अंत तक 64 हजार रुपये प्रति ग्राम तक पहुंच गई। केवल एक साल में गही गोल्ड 8 हजार रुपए बढ़ गया। इस रफ्तार से भी देखा जाए, तो गोल्ड आने वाले छह सालों में यानी 2030 तक 50 हजार तक तो बढ़ ही सकता है। मतलब, हर हाल में यह 1 लाख 20 हजार के पार तो हो ही जाएगा। इस साल यानी, 2024 में भी गोल्ड की कीमतों का दबदबा बना रहने का अनुमान है। गोल्ड के लिए भारतीयों का प्रेम वैसे भी किसी से छुपा नहीं है। कुछ अनुमानों के मुताबिक, भारत में अधिकारिक रूप से लगभग 25 हजार टन गोल्ड भंडार है, जिसमें से ज्यादातर गोल्ड ज्वेलरी या बुलियन के रूप में लोगों के पास घरों की अलमारी में बंद है।


इस साल की शुरूआत में, यानी जनवरी 2024 में ही ऐसा माना जा रहा था कि गोल्ड की कीमतें इस साल के अंत तक 70 हजार प्रति दस ग्राम के पास जा सकती है लेकिन हमने देखा कि अप्रेल के मध्य में ही गोल्ड ने तेजी पकड़ी और यह 76 हजार तक पहुंच गया। हालांकि अप्रेल खत्म होते होते यह फिर से 72 हजार के आसपास नीचे उतर गया, मगर गोल्ड मार्केट के जानकार कहते हं कि किसी भी तेजी में दस फीसदी का उतार चढ़ाव तो आता ही है, भले ही कुछ दिन के लिए हो, मगर गोल्ड का फिर से तेजी पकडऩा तय है। इसी से समझा है कि गोल्ड अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में तजी पकडऩे वाला है।  रूस - यूक्रेन और इजरायल - हमास के बीच चल रही जंग के कारण भी गोल्ड की कीमतों में दिसंबर 2023 में बड़ा उछाल दर्ज हुआ था, मगर, दोनों ही देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, तो इस साल भी ऐसे ही उछाल आने की संभावना है। गोल्ड बाजार के विशेषज्ञों का कहना है कि साल 2024 में गोल्ड की कीमतें बढक़र 2,700 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगी, ऐसे हालात में यदि रुपये की कीमत स्थिर रहती है तो गोल्ड के रेट्स इसी साल 90 हजार रुपये के पार भी पहुंच सकते हैं।


गोल्ड मार्केट के ताजा हालात पर नजर दौड़ाएं, तो साफ लगता है कि भारत में गोल्ड की डिमांड उसकी कीमतों के 75 हजार से पार की ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचने के बावजूद बढ़ गई है। वल्र्ड गोल्ड काउंसिल की एक जानकारी के मुताबिक बारत में मजबूत आर्थिक माहौल के दम पर जनवरी-मार्च तिमाही में सालाना आधार पर भारत में गोल्ड की डिमांड आठ प्रतिशत बढक़र 136.6 टन हो गई। देश की अर्थव्यवस्था को कंट्रोल करने वाले भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा लगातार की जा रही गोल्ड की खरीद से भी इसकी डिमांड में वृद्धि देखने को मिली है। वल्र्ड गोल्ड काउंसिल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इस साल जनवरी से लेकर मार्च तक गोल्ड की डिमांड बीते साल के मुकाबले 20 प्रतिशत बढ गई, और उधर गोल्ड की कीमतें भी केवल तीन महीने में ही 11 प्रतिशत की वृद्धि के साथ लगातार आगे ही जाती दिख रही है। वैसे हमने देखा है कि गोल्ड मार्केट में अप्रैल के तीसरे व चौथे सप्ताह में 76 हजार तक की तेजी से अभी के लिए, निवेशकों के मन में थोड़ा डर बढ़ गया है, क्योंकि गोल्ड का चार्ट तेजी से ऊपर चढक़र फिर से नीतचे उतर गया, जिससे गोल्ड की हाजिर कीमतें 2350 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। जैसे-जैसे अमेरिकी व्यापारिक सेशन आगे बढ़ा, यह ग्राफ कुछ हद तक 2340 डॉलर के स्तर तक कम हो गया है, मगर गोल्ड के हालात कमजोर होने वाले नहीं है। गोल्ड ऐतिहासिक रूप से अपने मजबूत मूल्य की स्थिति को और मजबूत करने की स्थिति में साफ दिख रहा है। सन 2024 की पहली तिमाही में ऐतिहासिक रूप से पकड़ी तेजी आने वाले दिनों में दूसरी तिमाही को भी सबसे निश्चित रूप से बनाए रखेगा, ऐसा अनुमान है। इसी अनुमान के आधार पर कहा जा सकता है कि इस साल के अंत तक गोल्ड के रेट्स लगभग 90 हजार रुपये के पार भी पहुंच सकते हैं और आने वाले 5 साल में निश्चित तौर से गोल्ड 1 लाख 70 हजार के पास पहुंच जाए तो किसी को भी आश्चर्य नहीं होना चाहिए।








नोविल राणावत - स्वर्ण शिल्प चेन्स

दुनिया के सभी देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है, हर देश में महंगाई बढ़ रही है तथा साथ की साथ बेरोजगारी भी लगातार बढ़ रही है, कहीं कहीं युद्ध के हालात भी चल रहे हैं।  इन सबका असर अर्थव्यवस्था पर हो रहा है और इसी से  गोल्ड के रेट्स लगातार बढ़ रहे हैं।

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मोनील जैन - जुगराज कांतीलाल एण्ड कं.

गोल्ड सदा से ही सबकी पसंद रहा है, इसके साथ ही गोल्ड की सबसे खास बात यह है कि रुपये की कीमतें अगर स्थिर रह जाती है तो इसी साल गोल्ड फिर से नई तेजी पकड़ सकता है। रेट्स वैसे भी 76 हजार का आंकड़ा छू चुके हैं, साल के अंत तक इसे और आगे ही बढऩा है।

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निखिल जैन - समृद्धि ज्वेलक्राफ्ट प्रा. लि.

कुछ दिन पहले तक केवल यह अनुमान लगाया जा रहा था कि इस साल 2024 में धनतेरस तक गोल्ड के भाव 72 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम पहुंच सकते हैं, लेकिन  अप्रैल में ही गोल्ड ने यह आंकड़ा पार करके सीधे 76 हजार का आंकड़ा छू लिया, मतलब तेजी तो साफ दिख रही है। 

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यश खांटेड - राज ज्वेलर्स

आने वाले दिनों में गोल्ड के रेट्स प्रति 10 ग्राम 1 लाख रुपये के पार भी तक जा सकते है यह दावा करना मुश्किल है। लेकिन गोल्ड में हो रही खरीदारी तथा दुनिया भर में आ रही तेजी  इस ओर इशारा कर रही है कि गोल्ड की कीमतों का ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंचना तय है।


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