सिल्वर में आगे क्या? ऑलटाइम हाई के बाद भारी गिरावट, अब आगे क्या?
- Aabhushan Times
- Apr 21
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वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता और मंदी की आशंकाओं के बावजूद, अप्रैल 2026 में सिल्वर की कीमतों में फिर से तेजी के संकेत दिख रहे हैं। मार्च के अंत में आई लगभग 30 फीसदी की भारी गिरावट के बाद अब बाजार में फिर से रेट्स की रिकवरी के कुछ ठोस आधार नजर आ रहे हैं।
सिल्वर की कीमतों में दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 की बेतहाशा तेजी के बाद आई अचानक तेज गिरावट ने बाजार को असमंजस में डाय दिया है। सिल्वर की इस गिरावट में देश भर के ज्वेलर्स भी परेशान हैं। उस समय जब सिल्वर लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही थी और निवेशकों के बीच आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र बनी हुई थी, वहीं अब इसमें आई तीव्र गिरावट ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या यह केवल अस्थायी सुधार है या किसी बड़े ट्रेंड के संकेत? यह सवाल सभी को सता रहा है। सिल्वर के मूल्य में 2025 में दोगुने से भी अधिक की वृद्धि हुई और इसने गोल्ड सहित अन्य कीमती धातुओं से बेहतर प्रदर्शन किया है। तो, 2026 की शुरूआत के साथ ही, 20 जनवरी को सिल्वर में एक झटके में ही 26 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट 1980 के दशक की शुरुआत के बाद सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट रही, जिसने सभी को बता दिया कि सिल्वर के बाजार की संरचना बड़ी गहन है, जो तेजी मंदी के बीच सदा झूलती रहती है। उसके लिए वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां तो जिम्मेदार हैं ही, सिल्वर की खपत करने वाले क्षेत्रों के प्रोडक्शन की घटत - बढ़त भी जिम्मेदार है।
लेकिन सिल्वर के 4 लाख से ऊपर रेट पहुंच जाने और बहुत तेजी गिरावट के बाद वर्तमान में, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और मजबूत भौतिक मांग के बीच, सिल्वर की कीमतों में फिर से तेजी के संकेत मिल रहे हैं। संभावना है कि भारी गिरावट के बाद, सिल्वर की औद्योगिक डिमांड के चलते सिल्वर में तेजी की वापसी हो सकती है, जिससे ज्वैलरी सेक्टर में भी खरीदी के सेंटिमेंट में सुधार हो रहा है। हालांकि, आने वाले दिनों में अमेरिका के महंगाई के आंकड़े और फेडरल ब्याज के रेट की नीतियां ही सिल्वर की चाल को और अधिक स्पष्ट करेंगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की व्यापार नीतियों से भी बाज़ार लगातार सहमा रहा है। बीते 2 साल में सिल्वर की क़ीमतों में 300 प्रतिशत की वृद्धि हुई और पिछले एक साल में सिल्वर में निवेशकों की भारी मांग देखी गई, जिससे एक के बाद एक रिकॉर्ड बने। कीमतें सीधे 4 लाख के पार पहुंच गई। इस तेज़ी ने अनुभवी ट्रेडरों को भी चौंका दिया और कीमतों में तेज़ उतार-चढ़ाव पैदा किया। जनवरी में यह रुझान और तेज़ हुआ, जब निवेशकों ने करेंसी की कमज़ोर होती कीमत, फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता को लेकर चिंता, ट्रेड वॉर और भू-राजनीतिक तनाव के बीच पारंपरिक सुरक्षित विकल्पों की ओर रुख किया। लेकिन ईरान पर हमले से कुछ वक्त सबसे से जो गिरावट शुरू हुई, तो फरवरी में फिर से धड़ाम की तरफ सिल्वर के तेजी से बढऩे ने भी सभी को डरा दिया। कुल मिलाकर लगभग 50 फीसदी, 4 लाख से सीधे 2 लाख के आसपास सिल्वर का आ जाना डराना लगा है। लोग मुनाफा बुक करके निकलने लगे। मगर, अब एक बार फिर से सिस्वर के तेजी पकडऩे की संभावना बताई जा रही है। लेकिन सिल्वर के ज्वेलर्स के लिए यह वक्त बाजार पर हर पल नजर रखने का है।
वैसे देखा जाए, तो सिल्वर की हालिया गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण रहे हैं। सबसे महत्वपूर्ण कारण है वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों का ऊंचा बने रहना और अमेरिकी डॉलर की मजबूती। जब ब्याज दरें अधिक होती हैं, तो निवेशक बिना जोखिम वाले साधनों जैसे बॉन्ड में निवेश करना अधिक पसंद करते हैं, जिससे सिल्वर जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों की मांग घट जाती है। इसके साथ ही, डॉलर के मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में सिल्वर महंगी हो जाती है, जिससे इसकी मांग पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। सिल्वर की हालिया गिरावट के पीछे दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण बड़ा कारण है सट्टा। सट्टा बाजार का टूटना सिव्रर को पीछे धकेलता है। पिछले वर्ष सिल्वर में आई तेज़ी ने बड़ी संख्या में अल्पकालिक निवेशकों और ट्रेडर्स को आकर्षित किया था। जैसे ही कीमतों में गिरावट शुरू हुई, इन निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे गिरावट और तेज हो गई। इस प्रकार का व्यवहार वित्तीय बाजारों में सामान्य है, जहां तेजी के बाद एक स्वाभाविक सुधार देखने को मिलता है। इसके बाद, एक जो तीसरा महत्वपूर्ण कारण है, वह यही है कि औद्योगिक डिमांड में अचानक आई नरमी। वैश्विक आर्थिक विकास की गति में कमी, विशेषकर चीन जैसे बड़े औद्योगिक देशों में सुस्ती ने सिल्वर की मांग को बेहद नकारात्मक तरीकेस स प्रभावित किया है। इसके अलावा, सोलर पॉवर सेक्टर में तकनीकी सुधारों के कारण सिल्वर के स्थान पर अन्य विकल्पों के उपयोग की संभावना भी बढ़ रही है, जो भविष्य में इसकी मांग को प्रभावित कर सकती है। इसके अतिरिक्त, वित्तीय बाजारों में लिक्विडिटी और नियमों में बदलाव भी इस गिरावट में योगदान दे रहे हैं। फ्यूचर्स बाजार में मार्जिन आवश्यकताओं में वृद्धि और ईटीएफ निवेश में कमी ने भी निवेशकों की भागीदारी को प्रभावित किया है। तो, ये सिल्वर की गिरावट के सबसे बड़े कारण रहे हैं।
हालांकि, इन नकारात्मक कारकों के बावजूद सिल्वर की दीर्घकालिक संभावनाएं अभी भी मजबूत बनी हुई हैं। सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू है वैश्विक स्तर पर ग्रीन एनर्जी और इलेक्ट्रिफिकेशन की ओर बढ़ता रुझान। सौर पैनलों और इलेक्ट्रिक वाहनों में सिल्वर का उपयोग अनिवार्य है, जिससे इसकी मांग आने वाले वर्षों में बढऩे की संभावना है। इसके साथ ही, वैश्विक स्तर पर लगातार आपूर्ति की कमी सप्लाई पर असर भी कीमतों को दीर्घकाल में समर्थन प्रदान कर सकती है। सिल्वर के मामले में, भविष्य की दिशा को लेकर तीन प्रमुख परिदृश्य सामने आते हैं। पहला, यदि अमेरिकी ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं और औद्योगिक मांग कमजोर रहती है, तो सिल्वर की कीमतों में और गिरावट संभव है। दूसरा, यदि बाजार में संतुलन बना रहता है, तो सिल्वर कुछ समय तक सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के साथ स्थिर रह सकती है। तीसरा, और सबसे सकारात्मक परिदृश्य, यह है कि यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां सुधरती हैं, ब्याज दरों में कटौती होती है और निवेश मांग बढ़ती है, तो सिल्वर में फिर से एक बार तेजी देखने को मिल सकती है।
सिल्वर सेक्टर के ज्वेलर्स के लिए यह समय बेहद सावधानी और रणनीतित करीके अपनाने का है। हम जानते हैं कि अल्पकालिक निवेशकों को बाजार की अस्थिरता नए अवसर प्रदान कर सकती है। बाजार के जानकार सिल्वर ज्वैलरी की सेल के आने वाले वक्त में तेजी पकडऩे के आसार बताते हैं, लेकिन ज्वेलर्स के लिए यह कम कीमतों का दौर एक साथ सिल्वर खरीदने का नहीं, बल्कि चरणबद्ध खरीदी का है, तो कुल मिलाकर एअवरेज रेट में मुनाफे का एक बेहतर विकल्प हो सकता है। रेट नीचे हं, तो इसका मतलब यह तो कतई नहीं कि एकमुश्त सिल्वर की खरीदी कर ली जाए। इस हालात से बचते हुए, सिल्वर में वर्तमान गिरावट के दौरान धीरे-धीरे खरीदी करना जोखिम को कम कर सकता है। कुल मिलाकर सिल्वर की वर्तमान गिरावट को केवल नकारात्मक दृष्टिकोण से देखना उचित नहीं होगा। 4 लाख से ऊपर तक पहुंचने का बाद सिल्वर का धड़ाम से नीचे आना, बाजार के स्वाभाविक चक्र का हिस्सा है, जो अत्यधिक तेजी के बाद संतुलन स्थापित करता है। सिल्वर आज भी एक महत्वपूर्ण बनी हुई है, जिसमें जोखिम के साथ-साथ दीर्घकालिक कमाई के अवसर भी निहित हैं। ऐसे में ज्वैलरी मार्केट के लिए समझदारी इसी में है कि सिल्वर की खरीददारी करते हुए बाजार में सेल के हालात को भी देखें, और ठोस तथ्यों तथा दीर्घकालिक व्यापारिक दृष्टिकोण के आधार पर अपनी रणनीति तय करें।
हालांकि अमेरिकी व्यापार नीतियों के तहत अमेरिका द्वारा सिल्वर पर टैरिफ लगाए जाने की आशंकाओं के कारण भी सिल्वर की कीमतों में उछाल आया, क्योंकि अमेरिका अपने सिल्वर भंडार के लगभग दो-तिहाई हिस्से को आयात करता है, जिसका उपयोग इंडस्ट्रीयल प्रोडक्शन के साथ-साथ आभूषण और निवेश के लिए भी किया जाता है। अमेरिका में सिल्वर का भंडारण भी बढ़ गया है, जिसके परिणामस्वरूप दुनिया के अन्य हिस्सों में इसकी कमी हो गई है। ऐसे हालात में, निर्माता आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए होड़ में लगे हुए हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सिल्वर की कमी के कारण उनका प्रोडक्शन बाधित न हो, जिससे वैश्विक बाजारों में कीमतें बढ़ गई हैं। ऐसे में, वर्तमान हालात में सिल्वर भले ही नीचे हो, लेकिन उम्मीद है कि आने वाले महीनों में सिल्वर की कीमत ऊंचाई की तरफ बनी रहेगी।


अमेरिका व इजराइस के ईरान से लड़ाई के हालात के कारण खाड़ी देशों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण सिल्वर की कीमतें गिर गई है। अब माना जा रहा है कि सिल्वर की कीमतें तभी बढ़ सकती है जब जंग समाप्त हो जाएगी। क्योंकि इसके बाद फिर से सिल्वर की खपत बढ़ेगी, तो रोट बढऩे ही हैं।


सिल्वर की कीमतों में भारी गिरावट बाद आगे क्या होगा, इस सवाल को समझने से पहले, यह समझना बेहद आवश्यक है कि सिल्वर केवल एक कीमती मेटल नहीं है, बल्कि एक महत्वपूर्ण औद्योगिक मेटल भी है। सिल्वर का और नीचे गिरना आसान नहीं है, क्योंकि वैश्विक संकेत सिल्वर की खपत बढक़े सासाथ ही इसके रेट बढऩे के समर्थन में भी हैं।


जो ज्वैलर्स केवल ज्वैलरी के बिजनेस में हैं, उनके इस बिजनेस में होने की वजह से सिव्लर केवल ज्वैलरी सेक्टर के नजरिये से ही देखने को प्रेरित करता है, लेकिन सिल्वर की मांग का एक बहुत ही बड़ा हिस्सा सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और अन्य तकनीकी उद्योगों से आता है। सिवल्वर को व्यापाक नजरिये से देखने की जरूरत है।
हेमंत बड़ोला -
वर्धमान ९२५ सिल्वर ज्वेलरी
एलएलपी


सिल्वर के घटने - बढऩे का व्यवहार गोल्ड से बहुत ही अलग तरीके का होता है। जहां गोल्ड मुख्य रूप से, हर देश की सरकार तथा हर देश को लोगों के लिए एक सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जाता है, वहीं सिल्वर पर आर्थिक गतिविधियों एवं उद्योग जगत के प्रोडक्शन का सीधा प्रभाव पड़ता है। आने वाले दिनों में सिल्वर तेजी पकड़ेगा।
आयुष सिंघवी -
अरिहंत ९२५ ज्वेलरी
प्रा. लि.










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