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सिल्वर में आगे तेजी की रफ्तार तय है

  • Aabhushan Times
  • Jul 26
  • 6 min read

दुनिया भर में इंडस्ट्रीयल डिमांड बरकरार, उसी से सिल्वर से उम्मी

सिल्वर एक ऐसी धातु है, जिसके बारे में पिछले कई सालों के अध्ययन के बावजूद, दावे के साथ कुछ भी कहा नहीं जा सकता। सिल्वर अपने ऑल टाइम हाई के लेवल 4.50 लाख से नीचे उतर कर लगभग आधे यानी 2.25 लाख रुपये प्रति किलो से भी नीचे आ गया है। लेकिन यह अभी भी एक साल पहले की तुलना में काफी मजबूत स्थिति में है। ऐसे में सभी के पास केवल एक ही सवाल है कि आगे क्या हाल रहेगा सिल्वर का? ऐसे हालात में हमें सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि हाल के वर्षों में सिल्वर ने निवेशकों को अभूतपूर्व तेजी और उतनी ही तेज गिरावट दोनों दिखाई हैं। अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर लगभग 4.50 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंचने के बाद इसमें भारी मुनाफावसूली देखने को मिली और कीमतें लगभग 2.25 लाख रुपए प्रति किलो के आसपास आ गईं। हालांकि यह गिरावट बड़ी दिखती है, लेकिन यदि पिछले एक वर्ष का परिदृश्य देखें तो सिल्वर अब भी मजबूत स्थिति में है और लंबी अवधि की तेजी का बड़ा हिस्सा बरकरार है। हालांकि, जून 2026 में सिवल्वर की कीमतों में रिकॉर्ड स्तर से भारी गिरावट आई है, जो इंटरनेशनल मार्केट में 56 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस और भारत के एमसएक्स में 2.15 लाख रुपये प्रति किलो तक आ गई है। इस भारी गिरावट का प्रमुख कारण अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना, तथा फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें न घटाने का संकेत और वायदा बाजारों में सिल्वर के मार्जिन का बढऩा सेबसे बड़े कारण हैं। 

ईरान और अमेरिका के बीच अस्थायी युद्धविराम समझौते की घोषणा के बाद सिल्वर की क़ीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। होर्मुज़ स्ट्रेट बंद होने की आशंका के दौरान कच्चे तेल, गोल्ड व सिल्वर की क़ीमतें अपने उच्च स्तर पर पहुंच गई थीं, लेकिन अब इन तीनों की क़ीमतों में बड़ी गिरावट आई है। अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सिल्वर की क़ीमत में पिछले सात महीनों की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की जा रही है और सिल्वर की क़ीमतें जनवरी के स्तर से कऱीब आधी से भी नीचे पहुंच गई है। फि़लहाल सिल्वर की कीमतें पिछले नवंबर के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। वैश्विक स्तर पर सिल्वर की कीमतें मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर, अमेरिकी केंद्रीय बैंक की ब्याज दरों, मुद्रास्फीति, वैश्विक आर्थिक विकास, भू-राजनीतिक तनाव और औद्योगिक मांग से प्रभावित होती हैं। जब निवेशक जोखिम से बचना चाहते हैं या मुद्रास्फीति बढ़ती है, तब सिल्वर में निवेश बढ़ता  है। दूसरी ओर, ब्याज दरें ऊंची होने या डॉलर मजबूत होने पर इसमें दबाव देखा जा रहा है।  

सिल्वर को कमोडिटी बाजार की सबसे अस्थिर धातुओं में माना जाता है। इसकी कीमत पर एक साथ कई कारकों का प्रभाव पड़ता है। यह केवल निवेश की धातु नहीं है, बल्कि उद्योगों में बड़े पैमाने पर उपयोग होने वाली रणनीतिक धातु भी है। यही कारण है कि इसके भविष्य के बारे में किसी भी प्रकार का निश्चित दावा करना मुश्किल माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सिल्वर का दीर्घकालीन आधार अभी भी मजबूत बना हुआ है। इसका सबसे बड़ा कारण लगातार बढ़ती औद्योगिक मांग है। इलेक्ट्रिक वाहन, सौर ऊर्जा, 5जी नेटवर्क, सेमीकंडक्टर, चिकित्सा उपकरण और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स में चांदी की खपत लगातार बढ़ रही है। दूसरी ओर, नई खदानों से उत्पादन अपेक्षाकृत धीमी गति से बढ़ रहा है, जिससे वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है। सिल्वर इंस्टीट्यूट के अनुसार, पिछले कई वर्षों से वैश्विक सिल्वर बाजार में मांग, आपूर्ति से अधिक बनी हुई है, जिसके कारण संरचनात्मक घाटा लगातार देखने को मिल रहा है। यही स्थिति दीर्घकाल में कीमतों को समर्थन प्रदान करती है। सन 2025 में सिल्वर की कीमत में लगभग 150 फीसदी की वृद्धि हुई, जनवरी 2026 में इसमें 19 प्रतिशत की और वृद्धि दर्ज की गई और यहां तक कि 30 जनवरी 2026 को हुई 26 फीसदी की गिरावट को ध्यान में रखने के बाद भी ये उछाल निवेशकों और उद्योगों की मजबूत मांग को दर्शाता है। भारत में भी सिल्वर की मांग लगातार बढ़ रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे गरीब का सोना माना जाता है, जबकि शहरी क्षेत्रों में निवेश, आभूषण और उपहार के रूप में इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है। इसके अलावा भारत विश्व के सबसे बड़े सिल्वर आयातकों में शामिल है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों के साथ-साथ रुपये-डॉलर विनिमय दर का भी घरेलू बाजार पर सीधा प्रभाव पड़ता है। जनवरी 2026 में सिल्वर की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल आया, जो कि व्यापक आर्थिक कारकों के तालमेल के गड़बड़ाने, बदलती आपूर्ति-मांग की स्थिति और औद्योगिक मांग में सुधार का नतीजा था। लेकिन अब सिल्वर फिर से अस्थिरता के दौर में प्रवेश कर चुका हैं। फरवरी में अमेरिकी फेडरल रिजर्व के मुखिया के पद के लिए केविन वॉर्श के नामांकन की घोषणा के बाद डॉलर में तेजी आई थी, जिसके परिणामस्वरूप सिल्वर सहित गोल्ड की कीमतों में तीन दशकों से अधिक समय में एक दिन में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। लेकिन बिकवाली की गति ने कई निवेशकों को आश्चर्यचकित कर दिया। मगर फिर सिल्वर उठ ही नहीं पाया। एक बार जो नीचे उचतरना शुरू हुआ, तो लगातार नीचे ही उतरता रहा और आने वाले कुछ दिनों - महीनों तक पिर से उसमें उछाल की संभावना अभी तक स्पष्ट नहीं है। 

आगे की बात करें तो निकट अवधि में सिल्वर में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यदि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, औद्योगिक मांग मजबूत रहती है और केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में नरमी अपनाते हैं, तो कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं, यदि डॉलर मजबूत होता है या वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती आती है, तो अस्थायी गिरावट भी संभव है। पिछले दिनों अमेरिकी फेडरल बैंक की हुई बैठक में अध्यक्ष केविन वार्श ने ब्याज दरों को लेकर सख़्त रुख़ अपनाया। उन्होंने अमेरिका में पिछले पांच वर्षों से महंगाई ऊंचे स्तर पर बने रहने पर चिंता व्यक्त की और महंगाई नियंत्रित करने को अमेरिकी केंद्रीय बैंक की सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया। इसी वजह से माना जा रहा है कि इस साल अमेरिकी फ़ेडरल बैंक एक या दो बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। ब्याज दरें बढऩे के संकेत मिलने के कारण निवेशक गोल्ड व सिल्वर से अपना पैसा निकालकर अमेरिकी डॉलर में निवेश कर रहे हैं। लेकिन मई महीने में, भारत सरकार द्वारा गोल्ड के साथ साथ सिल्वर पर भी  इंपोर्ट ड्यूटी को 6 से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिए जाने के असर से माना जा रहा था कि सिल्वर महंगा होगा, लेकिन यह तो लगातार गिरता ही जा रही है। इंपोर्ट ड्यूटी 15 फीसदी किए जाने की वजह केवल एक ही थी कि सिल्वर इंपोर्ट करने के लिए भारत सरकार को विदेशी मुद्रा डॉलर में खर्च करनी पड़ती है और इसका सीधा असर विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है। यही नहीं, डॉलर की मांग लगातार बढऩे से रुपये पर भी दबाव बढ़ता है। डॉलर के मुक़ाबले रुपया अभी अपने निचले स्तरों पर पहुंच पहुच कर सुधारने की कोसिश में है, लेकिन सुधर नहीं पा रहा है। 

रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान यु्द्ध के कारण दुनिया भर में निवेशकों ने सिल्वर में खूब निवेश किया है और इस तरह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिल्वर की कीमतों पर पिछले कुछ महीनों में भारी इज़ाफ़े के बाद तेजी पर न केवल विराम लगा बल्कि आधे से भी नीचे उतरकर सिल्वर सभी को परेशान करता जा रहा है। इस सबके बावजूद, वर्तमान में सिल्वर की कीमतों में भले ही भारी उतार-चढ़ाव और गिरावट देखने को मिल रहा है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर और तकनीकी क्षेत्रों से सिल्वर की औद्योगिक मांग मजबूत बनी हुई है, तथा सिल्वर ज्वेलरी के प्रति युवा पीढ़ी के आकर्षण को देखते हुए इसका दीर्घकालीन भविष्य उज्ज्वल माना जा रहा है। ब्लैक रॉक और जेपी मॉर्गन जैसे विशेषज्ञों का भी अनुमान है कि लंबी अवधि में इसकी सप्लाई की कमी को देखते हुए, सिल्वर की बुनियादी मजबूती अभी भी तेजी में ही है। कुल मिलाकर, अल्पकाल में सिल्वर का अनुमान लगाना कठिन है, लेकिन दीर्घकालीन दृष्टि से इसकी बढ़ती औद्योगिक उपयोगिता, सीमित आपूर्ति और मजबूत निवेश मांग इसे एक सकारात्मक आधार प्रदान करती है। यही कारण है कि भले ही निकट भविष्य में इसकी चाल अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाली बनी रहे, लेकिन दुनिया भर के सिल्वर मार्केट के अधिकांश विश्लेषक इसे लंबी अवधि में कमाई देने की संभावनाओं वाला मेटल मानते हैं।

कांतिलाल मेहता - सिल्वर एम्पोरियम
कांतिलाल मेहता - सिल्वर एम्पोरियम

सिल्वर की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव का सबसे ज्यादा असर खुदरा कारोबार पर है। सिल्वर के भाव तेजी से बढ़ रहे थे, तो ग्राहक खरीदारी कर रहे थे, जबकि कीमतों में गिरावट आने पर बिक्री कम हो गई है। हालांकि लगातार बदलते भाव के कारण हालात बेहद मुश्किल है, लेकिन उम्मीद पर दुनिया कायम है। रेट तो फिर से बढ़ेंगे, यही उम्मीद है।


कल्पेश सुराणा - सुराणा सिल्वर
कल्पेश सुराणा - सुराणा सिल्वर

थोक बाजार में सिल्वर के भाव में हर बड़ा बदलाव सीधे कारोबार की लागत और मार्जिन को प्रभावित करता है। ऊंचे भाव पर खरीदा गया स्टॉक अचानक सस्ता हो रहा है तो, कई ज्वेलर्स को नुकसान उठाना पड़ा है। लेकिन निवेशकों के लिए सिल्वर खरीदने का वक्त है। क्योंकि तेजी में पुराना स्टॉक बेहतर मुनाफा देता है, इसलिए जोखिम प्रबंधन बेहद जरूरी हो गया है।

विकास जैन - सिल्वेरियों अर्टेसा प्रा. लि.
विकास जैन - सिल्वेरियों अर्टेसा प्रा. लि.

आने वाले दिनों में सिल्वर ज्वेलरी की सेल बढ़ेगी। गोल्ड के लगातार महंगा होने से युवा और मध्यम वर्ग का रुझान सिल्वर ज्वेलरी की ओर बढ़ा है। यदि सिल्वर के दाम स्थिर रहते हैं तो मांग और बेहतर होती है, लेकिन रोजाना बड़े उतार-चढ़ाव से ज्वेलरी के ग्राहकों के खरीद के फैसला पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता। बाजार में सिल्वर ज्वेलरी का रौनक है।

भावना पुनमिया - सिल्वेरो
भावना पुनमिया - सिल्वेरो

त्यौहार और विवाह सीजन में सिल्वर ज्वेलरी की मांग स्वाभाविक रूप से बढ़ती है, लेकिन कीमतों में अचानक तेजी आने पर रिटेलर्स ऑर्डर कम कर देते हैं। यदि बाजार कुछ समय तक स्थिर रहे तो होलसेल और रिटेल कारोबार में अच्छा सुधार देखने को मिलेगा। आने वाले दिनों में सिल्वर के रेट फिर से बढऩा तय है, इसीलिए लोग खरीदी कर रहे हैं।


 
 
 

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