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अगले तीन वर्षों में रत्न और आभूषण का व्यापार दोगुना होकर ९१,००० करोड़ रूपये का हो जाएगा: GJEPC

  • Aabhushan Times
  • 5 days ago
  • 2 min read

भारत - EU के बीच हुए  FTA से व्यापारी वर्ग में खुशी की लहर












किरीट भंसाली - चेयरमैन-जीजेईपीसी

मुंबई। रत्न और आभूषण निर्यातकों ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का स्वागत किया है क्योंकि इससे रत्न और आभूषण उद्योग को राहत मिली है। इससे दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार खुल गया है और यह चीन और थाईलैंड के बराबर आ गया है, जिन्हें पहले से ही यूरोपीय संघ के साथ शून्य टैरिफ का लाभ मिल रहा है। जेम ऐंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (जीजेईपीसी) ने एक बयान में कहा कि वह भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत भारतीय रत्न और आभूषण उत्पादों पर आयात शुल्क को समाप्त करने का स्वागत करती है। बयान में कहा गया है, इससे कीमती आभूषणों पर लगने वाले 2-4 फीसदी शुल्क में छूट मिलेगी, जिससे 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ के साथ निर्यात की अपार संभावनाएं खुलेंगी, जो दुनिया के अभिजात्य खरीदारों का घर है। जीजेईपीसी के अनुसार, भारत के रत्न और आभूषण निर्यात का मूल्य कैलेंडर वर्ष 2024 में 30 अरब डॉलर रहा और यूरोपीय संघ के साथ द्विपक्षीय व्यापार 5.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें निर्यात 2.7 अरब डॉलर (कुल का 8.92 फीसदी) और आयात 2.5 अरब डॉलर रहा। बयान में कहा गया है कि भारत से यूरोपीय संघ को आभूषणों का आयात 62.8 करोड़ डॉलर तक सीमित है, जिसमें से 57.3 करोड़ डॉलर कीमती आभूषण और 5.5 करोड़ डॉलर इमिटेशन आभूषण हैं (जिन पर वर्तमान में 2-4 फीसदी शुल्क लगता है) जिससे बाजार पर गैर-एफटीए प्रतिस्पर्धियों का दबदबा बना हुआ है। जीजेईपीसी के अध्यक्ष किरीट भंसाली ने भारत-ईयू एफटीए को 'भी व्यापार समझौतों की जननी बताते हुए इसे सुरक्षित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को धन्यवाद दिया।


विज्ञप्ति में कहा गया है, भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता रत्न और आभूषण उद्योग के लिए बाजार विविधीकरण को बढ़ावा देगा। इस परिवर्तनकारी समझौते का लक्ष्य तीन वर्षों के भीतर द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 10 अरब डॉलर (91,000 करोड़ रुपये) तक पहुंचाना है।


दुनिया के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजार में शून्य शुल्क पहुंच से गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के निर्यात केंद्रों को कीमती आभूषण (सादे और जड़े हुए), चांदी और नकली आभूषणों का निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे भारत की प्रसिद्ध डिजायन क्षमता का लाभ उठाया जा सकेगा। विशेष रूप से अमेरिका को निर्यात में 44 फीसदी की गिरावट के बीच, यह समयोचित समझौता भारतीय निर्यातकों को खोई हुई स्थिति को फिर से हासिल करने में मदद करेगा।


 
 
 

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