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आरबीआई और वित्त मंत्रालय के साथ जीजेसी की पहलगोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम के नए स्वरूप पर जोर

  • Aabhushan Times
  • 1 day ago
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मुंबई। ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) ने गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम (GMS) को अधिक प्रभावी और व्यापक बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सक्रिय चर्चा शुरू की है। परिषद ने ज्वेलर्स को केंद्र में रखते हुए एक नया, डिजिटल और विनियमित ढांचा प्रस्तावित किया है। जीजेसी द्वारा प्रस्तुत इस संशोधित मॉडल को बैंकिंग, रिफाइनिंग और ज्वेलरी क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों से विचार-विमर्श के बाद तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य वर्तमान योजना में मौजूद संरचनात्मक कमियों को दूर करते हुए इसकी स्वीकार्यता और उपयोगिता को बढ़ाना है। नई योजना के तहत फिजिकल गोल्ड को डिजिटल गोल्ड बैलेंस में परिवर्तित किया जाएगा, जिसे बैंकिंग सिस्टम में संरचित खातों के माध्यम से रखा जाएगा। इससे निवेशकों को अपने निष्क्रिय सोने—जैसे बुलियन, सिक्के और आभूषण—पर रिटर्न प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। जीजेसी के अनुसार, यह ढांचा पारदर्शिता, ट्रेसबिलिटी और जवाबदेही के सिद्धांतों पर आधारित है। हर लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड, केवाईसी अनुपालन, ऑडिट ट्रेल और नियामकीय निगरानी इस योजना को अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाएंगे। 


जीजेसी चेयरमैन राजेश रोकड़े ने कहा कि यह पहल देश में निष्क्रिय सोने को औपचारिक वित्तीय प्रणाली में लाकर आयात पर निर्भरता कम करने और चालू खाते के घाटे (CAD)को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वहीं, वाइस चेयरमैन अविनाश गुप्ता ने इसे व्यावहारिक, विस्तार योग्य और निवेशकों के लिए लाभकारी मॉडल बताया। परिषद ने व्यापार जगत से इस पहल का समर्थन करने की अपील की है, ताकि भारत में एक पारदर्शी, विनियमित और डिजिटल गोल्ड इकोसिस्टम को मजबूती मिल सके।

 
 
 

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