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रिकॉर्ड तोड़ तेजी को बेताब गोल्डवैश्विक हालात से बन रही तेजी का दौर

Aabhushan Times
2 hours ago
6 min read

आने वाले दिनों में गोल्ड एक बार फिर से नया हाई बनाने की स्थितियां बन रही हैं और गोल्ड़ ट्रेड सेंटर्स की रिसर्च रिपोर्ट्स बताती हैं कि अगले छह महीनों में, अर्थात मार्च 2026 के आसपास गोल्ड अपने पिछले सारे रिकॉर्ड्स तोड़ कर आगे बढ़ता दिख सकता है।

गोल्ड को वैश्विक हालात ने इतिहास के सबसे मजबूत दौर में पहुंचा दिया है। हालात कह रहे हैं कि आने वाले वक्त में गोल्ड  की चाल तेज होगी और यह अपने अगले मजबूत स्तर पर पहुंचने को बेताब है। अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय परिदृश्य में आई भारी उथल-पुथल, केंद्रीय बैंकों की अभूतपूर्व खरीदारी और वैश्विक व्यापारिक समीकरणों में आ रहे बुनियादी बदलावों ने गोल्ड को सबसे महत्वपूर्ण बना दिया है। मुंबई के ज्वेलरी मार्केट के जो लोग, गोल्ड में मंदी की उम्मीद में बैठे हैं, उनको सावधान होने की जरूरत है। क्योंकि वित्तीय वर्ष 2026-27 के दूसरे हिस्से में प्रवेश करते हुए भारतीय बुलियन और ज्वैलरी उद्योग एक ऐसे ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है, जहां कीमतें नए रिकॉर्ड बना रही हैं और व्यवसाय करने के स्थापित पारंपरिक मापदंड तेजी से बदल रहे हैं। गोल्ड की इंटरनेशनल डेटा कहता हैं कि मार्च 2027 में गोल्ड 1.75 लाख से लेकर 1.85 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक जा सकते हैं। सन 2027 के अंत और 2028 की शुरूआत के महीनों में भारतीय बाजार में 2 लाख रुपए गोल्ड प्रति 10 ग्राम के पार देखा जा सकता है। दुनिया भर के विभिन्न देशों की डॉलर के खिलाफ लड़ाई चल रही है और भारत, चीन, रूस और मिडल ईस्ट के कई देशों सहित कई सारे देश डॉलर की ताकत को कम करने की कोशिश में हैं।  

गोल्ड के व्यापार का अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य काफी जटिल है और इन्हीं जटिलताओं के साथ लगातार विकसित भी हो रहा है। दुनिया के तीन सबसे महत्वपूर्ण गोल्ड़ ट्रेड सेंटर्स, लंदन ओटीसी बाजार, अमेरिकी वायदा बाजार और शंघाई गोल्ड एक्सचेंज में वैश्विक व्यापार का 90 फीसदी गोल्ड ट्रेड होता है और दुनिया भर के छोटे सैंकेड्री मार्केटेस पर सीधे उनका प्रभाव पड़ता है। गोल्ड के वैश्विक मैक्रो-डायनेमिक्स, सप्लाई चेन्स, रिटेल बिक्री, वर्किंग कैपिटल, और बेसिक रेट्स के पूर्वानुमान का व्यापारिक एवं रणनीतिक विश्लेषण करने वारी रिपोर्ट्स का दावा है कि सितंबर महीने के आखरी दिनों में अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गोल्ड 4400 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस एवं हाजिर भारतीय बाजार में गोल्ड 1,58 हजार के दायरे में टिका हुआ है, जिसने भारतीय घरेलू बाजार में 24 कैरट गोल्ड के भाव को लगभग स्थिरता के अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा दिया है। हालांकि उद्योग जगत, रिटेल ज्वैलर्स, निर्माताओं और बुलियन कारोबारियों के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि यहां से आगे गोल्ड कितना और महंगा होगा, और इसका प्रभाव ज्वैलरी बिजनेस के हर मुख्य पहलू पर कैसे पड़ेगा। ज्वैलरी बिजनेस से जुड़े ज्यादातार व्य़ापारी भले ही अपने अपने अंदेशे लगाते रहें, लेकिन गोल्ड की मौजूदा तेजी केवल किसी एक अस्थाई स्थिति का परिणाम नहीं है, बल्कि यह कई वैश्विक आर्थिक शक्तियों के एक साथ आने से उत्पन्न हुई महातेजी है। इसमें सबसे अहम है डी-डॉलरलाइजेशन और केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीदारी। दुनिया भर के लगभग सभी देशों के सैंट्रल बैंक अमेरिकी डॉलर की निर्भरता घटाने की कोशिश में है। विशेष रूप से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना और मिडल ईस्ट के देश अपनी विदेशी मुद्रा संपत्तियों में अमेरिकी डॉलर की निर्भरता कम कर रहे हैं। गोल्ड के अपने भंडार को बढ़ाना उनकी सॉवरिन वेल्थ सिक्युरिटी का प्राथमिक हिस्सा बन चुका है। सेंट्रल बैंकों द्वारा हर तिमाही सैकड़ों टन गोल्ड की यह निरंतर लिफ्टिंग बाजार से लिक्विड आपूर्ति को खींच रही है।

इस सारे हालात के बीच में विभिन्न देशों के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान भी सबसे अहम कारण है। वल्र्उ गोल्ड काउंसिल की कुछ रिपोर्ट्स बताती हैं कि मध्य-पूर्व और पूर्वी यूरोप में गहराते भू-राजनीतिक तनाव, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों में रुकावटें और रणनीतिक व्यापार प्रतिबंधों ने वैश्विक निवेशकों को सेफ-हेवन के रूप में गोल्ड की ओर रुख करने पर मजबूर किया है। यब बहुत बड़ा तथ्य है कि जब-जब भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ता है, संस्थागत पूंजी बॉन्ड या इक्विटी से निकलकर बुलियन में शिफ्ट होती है, तो गोल्ड के रेट्स बढ़ते हैं। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिजर्व तथा यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के साथ-साथ आर्थिक वृद्धि को सहारा देने के लिए ब्याज दरों में कटौती का चक्र जारी है। गिरती बॉन्ड यील्ड और कमजोर होता डॉलर सीधे तौर पर गोल्ड की होल्डिंग कॉस्ट को कम करते हैं, जिससे अंतर्राष्ट्रीय फंड्स का गोल्ड में निवेश बढ़ रहा है। हमारा भारत देश, गोल्ड की अपनी कुल घरेलू खपत का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इंपोर्ट करता है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये के एक्सचेंज रेट में निरंतर बना दबाव घरेलू बाजार में आयातित गोल्ड की लैंडिंग कॉस्ट को बढ़ा देता है। भले ही अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत कुछ समय के लिए स्थिर दिखे, लेकिन कमजोर रुपया भारतीय बाजारों में गोल्ड को महंगा बनाए रखता है। गोल्ड के वर्तमान में लगातार महंगे होना एवं होते रहना ऐसे हालात का भारत के ज्वैलरी बिजनेस पर व्यापक प्रभाव पड़ रहा है। गोल्ड की कीमतों में आए इस भारी उछाल ने भारतीय ज्वैलरी उद्योग के हर व्यापारिक पहलू पर गहरा प्रभाव डाला है। व्यापारिक दृष्टिकोण से देखें, तो गोल्ड की उच्चतम दरों के कारण रिटेल काउंटरों पर बिकने वाले कुल वजन में 15 से 20 फीसदी तक की गिरावट या सुस्ती दर्ज की गई है। हालांकि, गोल्ड के कारोबार के रुपयों में कुल मूल्य में 25  से 35 फीसदी तक का उछाल आया है। ज्वैलर्स के लिए इसका सीधा अर्थ है कि कम वजन बेचने के बावजूद उनका टॉप-लाइन रेवेन्यू बढ़ रहा है, लेकिन इन्वेंट्री रोटेशन की गति धीमी हुई है।मतलब साफ है कि गोल्ड महंगा हो रहा है, इस कारण टर्न ओवर तो ज्यादा हो रहा है, लेकिन गोल्ड की वजन में कम खरीदी - बिक्री हो रही है। 

ज्वैलर्स के लिहास से देखें, तो एक सामान्य रिटेल ज्वैलरी शोरूम या मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को समान वजन का स्टॉक बनाए रखने के लिए अब दोगुनी से अधिक वर्किंग कैपिटल की आवश्यकता पड़ रही है। ऐसे में बैंकों से मिलने वाली गोल्ड मेटल लोन की लिमिट और क्रेडिट लिमिट्स, गोल्ड की बढ़ती कीमतों के सामने छोटी पडऩे लगी हैं। मैन्युफैक्चरर्स और होलसेलर्स को कारीगरों और रिटेलर्स को दिए जाने वाले क्रेडिट डेज को घटाकर 15 से 30 दिनों के भीतर समेटना पड़ रहा है, जिससे कैश-फ्लो मैनेजमेंट बिजनेस का सबसे क्रिटिकल हिस्सा बन गया है। ज्वैलरी मार्केट्स में, लाइटवेट एवं हाई-वोल्युम डिज़ाइन्स का चलन बढ़ रहा है। अब 22 कैरट के बजाय 18 कैरट और 14 कैरट की ज्वैलरी को तेजी से अपना रहे हैं। दैनिक उपयोग और ऑफिस वेयर सेगमेंट में कम वजन में बड़ा लुक देने वाली टर्किश और इटैलियन टेक्नोलॉजी आधारित ज्वैलरी की डिमांड चरम पर है। पारंपरिक व ब्राइडल ज्वैलरी की बात करें, तो शादियों के सीजन के लिए जड़ाऊ, कुंदन, टेम्पल, मीनाकारी और एंटिक क्राफ्ट्स की मांग बरकरार है, लेकिन ग्राहक अब भारी ठोस गोल्ड के स्थान पर बेहतर स्टोन-सेटिंग, लाइटवेट एवं हाई-वोल्युम डिज़ाइन्स चुन रहे हैं ताकि बजट की सीमा में ज्वैलरी तैयार हो सकें। पुराना गोल्ड एक्सचेंज करके नई ज्वैलरी की कुल रिटेल बिक्री का योगदान बढक़र 40 से 50 फीसदी तक पहुंच गया है। ग्राहक अपनी पुरानी ज्वैलरी को री-साइकिल कराकर नई ज्वैलरी बनवा रहे हैं, जिससे भी ज्वैलरी बाजार में स्क्रैप गोल्ड की लिक्विडिटी बढ़ी है। इसका सबसे बड़ा कारण यही है कि गोल्ड महंगा हो रहा है, तथा इसके आने वाले दिनों में और महंगा होने के आसार पक्के हैं। आने वाले समय के लिए अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय बाजारों का अनुमानित रोडमैप देखें, तो आगामी त्यौहारी एवं शादी सीजन अल्पकालिक आउटलुक गोल्ड के अंतर्राष्ट्रीय रेट 4500 से 4700 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस और भीरतीय मुद्दा में 1.58 लाख से 1.65 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक जा सकते हैं। जानकार बताते हैं कि व्यापारिक दृष्टिकोण के तहत देखा जाए, तो शादी की खरीदारी और धनतेरस और दीपावली के चलते गोल्ड की डिमांड में अचानक उछाल आएगा। इस दौरान अल्पकालिक उतार-चढ़ाव भी संभव है, लेकिन 1.50 लाख के नीचे गोल्ड के जाने की की संभावना बेहद कम लग रही है। गोल्ड के डेटा का अध्ययन करने के बाद यह कहा जा सकता है कि 2027 के मध्य तक अंतर्राष्ट्रीय बाजेर में गोल्ड के रेट- 4800 से 5500 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस तक जा सकते हैं और भारतीय बाजार में गोल्ड के रेट्स में 1.75 लाख से लेकर 1.85 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक जा सकते हैं। 


मोहनलाल सेठ - एस के सेठ ज्चेलर्स
मोहनलाल सेठ - एस के सेठ ज्चेलर्स

बुलियन दरों में हर दिन 2 से 3 हजार रुपए का उतार-चढ़ाव आम बात हो गई है। ज्वैलर्स को सलाह है कि केवल 22 केरैट प्लेन गोल्ड पर निर्भर रहने के बजाय 18 केरैट और 14 केरैट डायमंड व प्रेशियस स्टोन ज्वैलरी पर भी ध्यान दें। इसमें मेकिंग चार्जेस का प्रतिशत बेहतर होता है और उपभोक्ता को कम बजट में प्रीमियम प्रोडक्ट मिलता है।

कांतिलाल शाह - अंसा ज्वेलर्स प्रा. लि.
कांतिलाल शाह - अंसा ज्वेलर्स प्रा. लि.

लगभग आधा कारोबार पुराने गोल्ड के एक्सचेंज पर निर्भर है, इसलिए शोरूम्स में आधुनिक कैरेट-मीटर और स्पष्ट रिफाइनिंग व बायबैक चार्ट्स के जरिए ग्राहकों का विश्वास मजबूत करना जरूरी है। पुरानी ज्वेलरी की खरीदी में भी ज्वैलर्स को कम से कम मुनाफे की मंशा रखनी चाहिए, ताकि ग्राहक का भरोसा बाजार में बढ़ेगा, तो व्यापार भी बढ़ेगा।

अजीत जैन - माणक ज्वेलर्स प्रा. लि.
अजीत जैन - माणक ज्वेलर्स प्रा. लि.

गोल्ड में चल रही यह ऐतिहासिक तेजी केवल सट्टा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक फाइनेंस सिस्टम के नए सिरे से गठन का सीधा परिणाम है। भारत के ज्वैलरी बिजनेस के लिए यह समय चुनौतियों के साथ-साथ अभूतपूर्व अवसरों का भी है। आने वाले दिनों में 1.60 से 1.80 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के रेट्स गोल्ड में नॉर्मल बात हो जाएंगी।

धीरज मेहता - मेहता एण्ड सन्स
धीरज मेहता - मेहता एण्ड सन्स

गोल्ड की कीमतों में उछाल ने भारतीय ग्राहकों की क्रय क्षमता और पसंद को भी पूरी तरह से  बदलकर रख दिया है। ऐसे में, जो ज्वैलर्स सही हेजिंग तकनीक, लाइटवेट एवं इनोवेटिव डिज़ाइन्स, पारदर्शी बिलिंग और अनुशासित वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट को अपनाएंगे, वे इस रिकॉर्ड-तोड़ महंगाई के दौर में भी अपने व्यापार को नए शिखर पर ले जा  सकेंगे।



 
 
 

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