गोल्ड का महत्व बरकराररेट स्थिर, लेकिन फिर से तेजी के संकेत
- Aabhushan Times
- May 14
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गोल्ड मई महीने के पहले सप्ताह में भी पिछले दो महीनों की तरह, १.5० लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के रेट पर स्थिर ही नजर आ रहा है। लेकिन इसको लेकर बाजार में असमंजस है, क्योंकि वैश्विक संकेत साफ तौर पर कह रहे हैं कि गोल्ड फिर से ऊपर की तरफ जा सकता है। क्योंकि मार्च 2026 की तिमाही में गोल्ड ज्वेलरी की मांग 19.5 फीसदी गिरकर 66 टन पर आ गई, जबकि निवेश की मांग 52 फीसदी बढक़र 82 टन तक पहुंच गई। हालांकि, बढ़ी कीमतों के कारण बाजार स्थिरता के संकेत दे रहा है, फिर भी जानकारों की राय में गोल्ड के रेट ऊपर जाने के संकेत साफ हैं। जनवरी 2026 की बात करें, तो इस साल की शुरुआत में 24 कैरेट गोल्ड के रेट लगभग 1,35,000 रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर थे। फरवरी 2026 में वैश्विक संकट और रुपये की कमजोरी के चलते इसके रेट्स बढक़र 1,64,000 और उसके बाद तेजी से सीधे 1,84,000 प्रति 10 ग्राम की रिकॉर्ड ऊंचाई तक चले गए। बीते दो महीने से गोल्ड 1,50,000 के आसपास चल रहा है, जिसे स्थिर माना जा रहा है, लेकिन यह कब अपनी चाल तेज कर दे, कुछ भी कहा नहीं जा सकता।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में गोल्ड एक सुरक्षित निवेश है। जब भी दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता, युद्ध, मुद्रास्फीति या मुद्रा संकट जैसी स्थितियां पैदा होती हैं, निवेशक गोल्ड की ओर रुख करते हैं। वर्ष 2024-2026 के बीच वैश्विक परिदृश्य में कई बड़े बदलाव देखने को मिले। भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की नीतियों में बदलाव, डॉलर की मजबूती और कमजोरी के अलावा गोल्ड की दुनिया भर के देशों में बहुत तेजी से बढ़ती माग और बढ़ती महंगाई दरों ने गोल्ड की कीमतों को लगातार प्रभावित किया है। भारत जैसे देश में, जहां गोल्ड केवल निवेश नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक परंपरा का हिस्सा है, वहां इसके प्रभाव और भी गहरे होते हैं। शादी-ब्याह, त्योहारों और पारिवारिक परंपराओं में गोल्ड की अहम भूमिका होती है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में ग्राहक व्यवहार तेजी से बदल रहा है। जहां एक ओर ज्वेलरी की मांग में कमी देखी जा रही है, वहीं निवेश के रूप में गोल्ड बार और कॉइन की खरीद बढ़ रही है।
गोल्ड के वर्तमान हालात साफ है कि ज्वेलरी में ग्राहकी की कमी आई है। मगर 1,50,000 के रेट् के बावजूद गोल्ड बार और कॉइन में खरीदी बढ़ी है। इसीलिए कहा जा रहा है कि तेजी के हालात में भी वर्तमान समय में गोल्ड मार्केट एक दिलचस्प बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड की कीमतें उच्च स्तर पर बनी हुई हैं, जिसका सीधा असर भारत के रिटेल मार्केट पर पड़ा है। महंगे गोल्ड के कारण आम उपभोक्ता ज्वेलरी खरीदने से हिचक रहा है। खासकर मध्यम वर्ग, जो पारंपरिक रूप से ज्वेलरी का बड़ा ग्राहक रहा है, अब अपनी खरीद को सीमित कर रहा है। इसके विपरीत, निवेश के नजरिए से गोल्ड बार और कॉइन की मांग तेजी से बढ़ी है। इसका मुख्य कारण यह है कि लोग गोल्ड को आभूषण के बजाय सुरक्षित निवेश के रूप में देख रहे हैं। बार और कॉइन में मेकिंग चार्ज कम होता है और उन्हें जरूरत पडऩे पर आसानी से बेचा जा सकता है। इसके अलावा, डिजिटल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ जैसे विकल्पों ने भी निवेशकों का ध्यान खींचा है। युवा निवेशक अब पारंपरिक ज्वेलरी की बजाय इन आधुनिक विकल्पों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
अमेरिका व ईरान युद्ध का गोल्ड पर सीधे असर देखने को मिल रहा है। हर अंतरराष्ट्रीय राजनीति का गोल्ड की कीमतों पर हमेशा सीधा प्रभाव पड़ता है, और अमेरिका व ईरान के बीच बढ़ते तनाव इसका स्पष्ट उदाहरण है। जब भी मध्य पूर्व में युद्ध या संघर्ष की स्थिति बनती है, वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ जाती है। इस अनिश्चितता के कारण निवेशक जोखिम वाले एसेट्स, जैसे शेयर बाजार से पैसा निकालकर गोल्ड जैसे सुरक्षित निवेश में लगाते रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित युद्ध या तनाव से तेल की कीमतों में भी उछाल आता रहा है, जिससे वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ी है। जनवरी 2016 की शुरुआत में गोल्ड 1.36 लाख रुपए प्रति 1० ग्राम के स्तर पर था, मगर जनवरी के अंत में एक ही दिन में बड़े लिक्विडिटी स्विंग के कारण कीमतों में अचानक 8 फीसदी की भारी गिरावट देखी गई। फरवरी - मार्च 2026 में बाजार में सुधार हुआ और गोल्ड 1.50 लाख से 1.59 लाख तक जा पहुंचा। मार्च 2026 में गोल्ड ने अपना ऑल-टाइम हाई 1.84 लाख प्रति 10 ग्राम छुआ। अप्रैल में कीमतों में मामूली गिरावट आई और भाव 1.45 लाख से 1.55 लाख के बीच रहे। और मई की शुरूआत में 24 कैरेट गोल्ड के रेट 1,52 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम दर्ज किए गए। इसलिए कहा जा रहा है कि इसकी मांग और कीमत दोनों आगे भी बढऩा तय है। इसके अलावा, डॉलर की स्थिति भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। युद्ध के कारण डॉलर कमजोर है, तो गोल्ड और अधिक आकर्षक हो गया है। भारत जैसे आयात पर निर्भर देश में इसका असर और भी ज्यादा देखा जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में बढ़ोतरी सीधे भारतीय बाजार में दिखाई दे रही है, जिससे गोल्ड और महंगा हो सकता है।
यह भी एक बेहद महत्वपूर्ण वैश्विक मामला है कि भारत ने हाल ही में लंदन से अपना 104 टन गोल्ड वापस मंगाकर एक रणनीतिक और दूरगामी फैसला लिया है। यह गोल्ड बैंक ऑफ इंग्लैंड की तिजोरियों में सुरक्षित रखा गया था, जहां दशकों से कई देशों का गोल्ड रिजर्व जमा रहता हैं। इस कदम के पीछे सबसे बड़ा उद्देश्य अपनी आर्थिक सुरक्षा को और मजबूत करना है। सवाल है कि भारत द्वारा ब्रिटेन से आखिर अपना गोल्ड रिजर्व वापस मंगवाने का निर्णय क्यों महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह कदम केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी अहम है। भारत का एक बड़ा हिस्सा गोल्ड रिजर्व पहले विदेशी बैंकों, विशेषकर ब्रिटेन में रखा जाता था। लेकिन बदलते वैश्विक हालात और आत्मनिर्भरता की नीति के तहत भारत ने अपने गोल्ड को देश में वापस लाने का निर्णय लिया। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि वैश्विक अनिश्चितता के दौर में देश अपने संसाधनों पर अधिक नियंत्रण रखना चाहते हैं। घरेलू स्तर पर गोल्ड रिजर्व रखने से आपातकालीन परिस्थितियों में उसका उपयोग करना आसान होता है। इसके अलावा, यह कदम भारत की आर्थिक मजबूती और आत्मविश्वास को भी दर्शाता है।
भारतीय घरेलू गोल्ड के मोनेटाइजेशन का प्रस्ताव भी सरकार के पास विचाराधीन है। भारत में घरों और मंदिरों में लगभग 25 हजार टन गोल्ड निष्क्रिय रूप से पड़ा हुआ है। यदि इस गोल्ड को आर्थिक प्रणाली में शामिल किया जाए, तो यह देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है। इसी उद्देश्य से गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम लाई गई थी। इस योजना के तहत लोग अपने गोल्ड को बैंक में जमा कर सकते हैं और उसके बदले ब्याज प्राप्त कर सकते हैं। इससे दो फायदे होते हैं—एक, लोगों को निष्क्रिय संपत्ति से आय मिलती है; और दूसरा, देश को गोल्ड के आयात पर निर्भरता कम करनी पड़ती है। यदि यह योजना सफल होती है, तो भारत का जीडीपी घाटा कम हो सकता है और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घट सकता है। हालांकि, इस योजना की सफलता में कई चुनौतियां भी हैं—लोग भावनात्मक कारणों से अपना गोल्ड बैंक में जमा करने से हिचकते हैं, और शुद्धता व सुरक्षा को लेकर भी चिंता रहती है। फिर भी, यदि सरकार जागरूकता बढ़ाए और भरोसा कायम करे, तो गोल्ड मोनेटाइजेशन भारत की अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है।
दुनिया के जो हालात हैं, उस में ग्राहकी कम होने की वजह से ज्वेलर्स के हालात असमंजस से भरे हैं। वर्तमान बाजार परिस्थितियों में ज्वेलर्स एक दुविधा में हैं। एक ओर गोल्ड की कीमतें लगातार ऊंची बनी हुई हैं, जिससे ज्वेलरी की मांग घट रही है; दूसरी ओर निवेश आधारित गोल्ड की मांग बढ़ रही है, जिसमें उनका मार्जिन कम होता है। ज्वेलर्स को अब अपनी रणनीति बदलने की जरूरत है। उन्हें हल्के वजन ज्वेलरी, कस्टमाइज्ड डिजाइन्स और किफायती विकल्पों पर ध्यान देना चाहिए, ताकि ग्राहक बजट के भीतर खरीदारी कर सके। इसके अलावा, डिजिटल प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन बिक्री को अपनाना भी जरूरी हो गया है। युवा ग्राहक अब ऑनलाइन शॉपिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं। ज्वेलर्स को निवेश उत्पादों जैसे गोल्ड कॉइन, बार और डिजिटल गोल्ड में भी अपनी मौजूदगी बढ़ानी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्हें ग्राहकों के बदलते व्यवहार को समझना होगा। अब ग्राहक केवल सुंदरता नहीं, बल्कि वैल्यू और रिटर्न भी देख रहा है।
गोल्ड मार्केट इस समय परिवर्तन के दौर में है। वैश्विक तनाव, आर्थिक अनिश्चितता और बदलते उपभोक्ता व्यवहार ने इसके स्वरूप को बदल दिया है। जहां एक ओर गोल्ड अभी भी सुरक्षित निवेश बना हुआ है, वहीं पारंपरिक ज्वेलरी की मांग में कमी एक नया ट्रेंड दर्शाती है। भारत के लिए यह समय अवसर और चुनौती दोनों लेकर आया है, एक ओर गोल्ड मोनेटाइजेशन और रिजर्व मैनेजमेंट से आर्थिक मजबूती मिल सकती है, वहीं ज्वेलरी सेक्टर को खुद को बदलना होगा। अंतत:, गोल्ड केवल एक धातु नहीं, बल्कि विश्वास और स्थिरता का प्रतीक है। बदलते समय के साथ इसकी भूमिका भी बदल रही है, और जो इस बदलाव को समझेगा, वही भविष्य में सफल होगा।

अमेरिका-ईरान के युद्ध जैसे वैश्व्क राजनीतिक तनाव केवल उस इलाके का क्षेत्रीय मुद्दा नहीं, बल्कि वैश्विक गोल्ड मार्केट को प्रभावित करने वाले कारण हैं और उसी कारण भारत जैसे देश में उपभोक्ता व्यवहार को भी बदल रहा हैं। आने वाले वक्त में गोल्ड महंगा ही होगा, इसके नीचे उतरने के संकेत नहीं हैं।


सुना जा रहा है कि भारत सरकार हमारे घरों में पड़े गोल्ड के बारे में नई स्कीन ला रही है। खबरों के मुताबिक भारत में घरों और मंदिरों में लगभग 25 हजार टन गोल्ड निष्क्रिय रूप से पड़ा हुआ है। सरकार इस गोल्ड को आर्थिक प्रणाली में शामिल करके देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश है।


मई में गोल्ड की कीमतें 1.51 लाख से 1.54 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर हैं। लेकिन पिछले 6 महीनों में वैश्विक और घरेलू कारणों से गोल्ड में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिससे निवेशकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई। लेकिन गोल्ड एक बार फिर से आने वाले वक्त में तेजी पकड़ेगा।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत अपने संसाधनों को लेकर अधिक सतर्क है और स्वतंत्र नीति अपना रहा है। लंदन से 104 टन गोल्ड वापस मंगवाने के निर्णय का घरेलू गोल्ड मार्केट पर सकारात्मक प्रभाव रहेगा, क्योंकि इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ता है कि सरकार गोल्ड को महत्वपूर्ण संपत्ति मानती है।










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