top of page

सिल्वर फिर नई तेजी पकड़ेगा? गोल्ड ज्यादा महंगा, तो सिल्वर में निवेश बढ़ा

  • Aabhushan Times
  • 2 hours ago
  • 6 min read

पिछले कुछ वर्षों में सिल्वर कभी तेज उछाल, तो कभी अचानक गिरावट दिखाता रहा है। तो क्या आने वाले समय में सिल्वर फिर से नई तेजी पकड़ सकता है? वैश्विक विशेषज्ञों के हिसाब से इसका जवाब हां में है। सिल्वर के बहुत तेजी से बढऩे के आसार काफी मजबूत हैं।
















सिल्वर पर एक बार फिर दुनिया भर की नजर है क्योंकि आने वाले वक्त में सिल्वर एक बार फिर से नई तेजी पकड़ेगा, यह कहना है सिल्वर के वैश्विक जानकारों का। कारण केवल यही ही है कि सिल्वर के बढ़ते औद्योगिक उपयोग और लगातार कम होती सीमित आपूर्ति के कारण इसमें भविष्य में और तेजी की प्रबल संभावना जताई जा रही है। सिल्वर के महंगे होने के बारे में कुछ तथ्य देखें, तो 2026 में गोल्ड व कॉइन में फिजिकल निवेश लगभग 20 फीसदी बढऩे की संभावना है। दूसरा तथ्य यह है कि कुल सिल्वर उत्पादन का 50 से 60 फीसदी  उपयोग उद्योग से संबद्ध उत्पादनों में होता है। तीसरा तथ्य यह है कि गोल्ड महंगा होने पर लोग बहुत तेजी से सिल्वर में शिफ्ट हो रहे हैं। हम सभी ने देखा है कि जनवरी 2026 में सिल्वर ने लगभग 121 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस  का रिकॉर्ड हाई छुआ। लेकिन इसके बाद सिल्वर 35-40 फीसदी गिरकर सीधे 70-75 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस  पर आ गया। तो भारत में कीमतें लगभग 2.2 लाख से लेकर 2.4 लाख के आसपास उतर गईं। जो कि मई महीनेके शुरू में भी केवल 2.5 लाख से लेकर 2.6 के बीत ही चल रही है। मगर, जो ताजा माहौल दिख रहा है, उनके हिसाब से, सिल्वर अभी भी 100 फीसदी, मतलब फिर से 4.5 लाख रुपए प्रति किलोग्राम से ऊपर जाने के आसार पक्के हैं। सिल्वर का दीर्घकालीन भविष्य सकारात्मक है।


सबसे पहले सिल्वर की मौजूदा स्थिति को समझना जरूरी है। साल 2025 में सिल्वर ने शानदार प्रदर्शन किया और कीमतों में 100 फीसदी से अधिक की तेजी देखी गई। साल 2026 की शुरुआत में यह अपने उच्च स्तर के करीब पहुंचा, लेकिन उसके बाद इसमें गिरावट आई और कीमतें नीचे आ गईं। हालांकि, यह गिरावट किसी कमजोरी का संकेत नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे बाजार का सामान्य सुधार कहा जा रहा है। लंबी अवधि के ट्रेंड में सिल्वर अभी भी मजबूत बना हुआ है। सिल्वर के भविष्य के प्राइस आउटलुक को लेकर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है, लेकिन दिशा लगभग एक जैसी है। कुछ विश्लेषक मानते हैं कि सिल्वर स्थिर रूप से बढ़ेगा और मध्यम स्तर पर रहेगा, जबकि कुछ का मानना है कि यह आने वाले वर्षों में नए उच्च स्तर बना सकता है। लेकिन यह तय है कि सिल्वर की कीमतें फिर से तेजी पकड़ सकती हैं और नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकती हैं। लेकिन इसमें तेजी कभी भी सीधी नहीं आएगी, उतार चढ़ाव वाली ही आएगी।


सिल्वर में जब जब गिरावट आई है, तो सिल्वर लॉन्ग-टर्म ट्रेंड भी मजबूत दिखता रहा है। क्योंकि   भारत में ज्वेलरी एवं निवेश दोनों में मांग बढ़ रही है, और चीन में इंडस्ट्रियल और ट्रेडिंग डिमांड भी तेजी से बढ़ रही है। मार्केट के जानकार बताते हैं कि साल 2026 में सिल्वर की ग्लोबल सप्लाई 4 फीसदी घटने का अनुमान है लेकिन खपत 20 फीसदी बढऩे के आसार है। इस तरह से उत्पादन और खपत दोनों के बीच यह 24 फीसदी का फासला सिल्वर के रेट को बढ़ाने के लिए खास कारण है। पिछले एक वर्ष में सिल्वर के बाजार ने काफी उतार-चढ़ाव देखा है। कीमतों में तेजी आई, फिर गिरावट हुई, और उसके बाद पुन: सुधार देखने को मिला। इस दौरान बाजार का व्यवहार अनियमित रहा, जिससे कई निवेशकों ने लाभ कमाया, जबकि कई को नुकसान भी उठाना पड़ा। हाल के समय में सिल्वर में जो तकनीकी ब्रेकआउट देखने को मिला है, वह संकेत देता है कि बाजार एक नए तेजी के दौर की ओर बढ़ सकता है। 


पिछले साल 2025 के अंत और साल 2026 की शुऊआत में, अगर किसी एक धातु ने लोगों को, सबसे ज्यादा चौंकाया तो वो है सिल्वर की रिकॉर्ड तोड़ कीमतों ने। सिल्वर को आधुनिक अर्थव्यवस्था की एक महत्वपूर्ण धातु के रूप में देखा जाता है। क्योंकि सिल्वर केवल ज्वेलरी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि निवेश और औद्योगिक जरूरतों के क्षेत्रों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। यही दोहरी ताकत सिल्वर के बाजार को अत्यधिक गतिशील और उतार-चढ़ाव वाला बनाती है। आने वाले वक्त में, भारतीय बाजार में सिल्वर के रेट्स वर्तमान के 2.6 लाख रुपए प्रति किलोग्राम से बढक़र 3.5 से 4 लाख रुपए प्रति किलोग्राम तक फिर से पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। यह सिल्वर में फिर से एक नई तेजी की तैयारी है। मई महीने के शुरू में, सिल्वर की कीमत 75 डॉलर के ऊपर निकली है और इसी महीने यह 85 से 90 डॉलर तक जा सकती है, जबकि 70 डॉलर पर मजबूत सपोर्ट दिखता है। 


वर्तमान समय में सिल्वर का बाजार लगातार परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और इसके भविष्य को लेकर निवेशकों तथा विशेषज्ञों के बीच काफी चर्चा हो रही है। पिछले 2025 के अंत में चीन ने ऐलान किया था कि वह सिल्वर के एक्सपोर्ट पर सख्त नियंत्रण लगाएगा। अब कोई भी कंपनी मनमर्जी से सिल्वर चीन से बाहर नहीं भेज सकेगी। ऐसे में, ध्यान देने वाली बात यह है कि चीन दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सिल्वर उत्पादक और सबसे बड़ा उपभोक्ता भी है। चीन का ये वहीं बिजनेस मॉडल है कि जैसे चावल बेचने से बेहतर है पुलाव बेचो। वही मॉडल अब सिल्वर पर लागू हो रहा है। इसी वजह से सिल्वर की सप्लाई घट रही है,  उसकी मांग लगातार बढ़ रही है और निवेशक घबराकर खरीदारी कर रहे थे। लेकिन सिल्वर के रेट जैसे ही नीचे आए, तो निवेशक भी थम गए। वर्तमान समय में सिल्वर की कीमतें एक महत्वपूर्ण स्तर पर हैं। मई 2026 की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सिल्वर का मूल्य लगभग 76 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस के आसपास रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्तर सिल्वर का आधार स्तर है, जहां से आगे की दिशा में मजबूत तेजी देखने को मिल सकती है। औद्योगिक मांग लगातार बढ़ रही है, जबकि उत्पादन की गति अपेक्षाकृत धीमी है। सिल्वर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक साथ औद्योगिक धातु और निवेश साधन दोनों के रूप में कार्य करता है। दुनिया में सिल्वर के कुल उत्पादन का 60 फीसदी उपयोग सिल्वर औद्योगिक क्षेत्र में होता है। सिल्वर का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, चिकित्सा उपकरण, बैटरी और ऑटोमोबाइल उद्योग में व्यापक रूप से होता है। दूसरी ओर, निवेश के रूप में सिल्वर को सुरक्षित विकल्प माना जाता है, विशेषकर तब जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ती है। भविष्य के दृष्टिकोण से देखा जाए तो सिल्वर के लिए संभावनाएं सकारात्मक दिखाई देती हैं। विभिन्न विश्लेषकों और ब्रोकरेज फर्मों के अनुसार 2026 के अंत तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में सिल्वर की कीमतें 110 अमेरिकी डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती हैं। कुछ अनुमानों में यह भी कहा गया है कि कीमतें 115 डॉलर प्रति औंस के ऐतिहासिक स्तर को फिर से छू सकती हैं। भारतीय बाजार में भी सिल्वर की कीमतें 2.6 लाख रुपए प्रति किलोग्राम से बढक़र 3.5 से 4 लाख रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। ग्रीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता जैसे कारक इस संभावित तेजी को समर्थन दे रहे हैं। हालांकि सिल्वर में निवेश के साथ जोखिम भी जुड़े हुए हैं। इसकी कीमतों में उच्च अस्थिरता के कारण अचानक गिरावट भी देखी जा सकती। निवेश के दृष्टिकोण से सिल्वर एक आकर्षक विकल्प है, लेकिन इसमें संतुलित रणनीति अपनाना जरूरी है। दीर्घकालिक निवेश में इसके अच्छे परिणाम मिल सकते हैं, वहीं अल्पकालिक ट्रेडिंग में भी अवसर उपलब्ध रहते हैं। निवेशकों को चरणबद्ध निवेश और जोखिम प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना चाहिए। अंतत: यह कहा जा सकता है कि सिल्वर एक बहुआयामी धातु है, जिसकी उपयोगिता और मांग दोनों ही तेजी से बढ़ रही हैं। वर्तमान बाजार परिस्थितियों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि सिल्वर एक नए तेजी के चरण की ओर बढ़ रहा है। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो आने वाले समय में यह अपने पिछले उच्च स्तरों को पार कर सकता है। 


सिल्वर सेक्टर के जानकार कहते हैं कि दुनिया के कुल उत्पादन मे से, लगभग 50 से 60 फीसदी सिल्वर का उपयोग उद्योग क्षेत्र में होता है। सिल्वर के रेट बढऩे की संभावना में, अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनाल्ड ट्रंप की व्यापारिक नीतियां भी एक बहुत बड़ा कारण है। ट्रंप की व्यापारिक नीतियों कू वजह से, अमेरिका-चीन व्यापार तनाव कभी भी फिर बढऩे की संभावनाएं सदा जीवित है। चीन ने हाल ही में रेयर अर्थ मेटल्स की सप्लाई चेन पर कड़े नियंत्रण लगाए हैं, जिसमें सिल्वर बेहद अहम है। अमेरिका ने कहा है कि अगर चीन अपने अर्थ मेटल्स की सप्लाई चेन पर लगाए गए कड़े नियंत्रणों में ढील नहीं देता है, तो अमेरिका ज्यादा समय तक इंपोर्ट ड्य़ूटी पर रोक बढ़ा सकता है। विश्व बैंक ने भी चीन के इस कदम को कमजोर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक बताया है। लेकिन चीन ने इसके जवाब में अमेरिका को दोषी ठहराते हुए कहा हा कि बढ़ते तनावों के लिए अमेरिका जिम्मेदार है। तस्वीर साफ है कि सिल्वर का फिलहाल का रुख चढ़ाव वाला है, लेकिन इसमें बीच - बीच में तेज उतार-चढ़ाव की संभावनाएं भी सदा से बनी रहती है।

 
 
 

Comments


Top Stories

Bring Jewellery news straight to your inbox. Sign up for our daily Updates.

Thanks for subscribing!

  • Instagram
  • Facebook

© 2035 by Aabhushan Times. Powered and secured by Mayra Enterprise

bottom of page