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ज्वेलरी ट्रेड का भविष्य मुंबई ज्वेलरी का हब, लेकिन ज्वेलर्स क्या करें

  • Aabhushan Times
  • 3 hours ago
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भारत का ज्वेलरी बाजार परंपरागत रूप से मजबूत रहा है। लेकिन डायमंड, गोल्ड, सिल्वर, प्लैटिनम व लैबग्रोन डायमंड ज्वेलरी बिजनेस वर्तमान में गिरावट के दौर में है। हाल के समय में इसमें स्पष्ट सुस्ती दिख रही है। परिदृश्य यह है कि वैश्विक स्तर पर गोल्ड और सिल्वर के लगातार उतार - चढ़ाव, महंगाई और उपभोक्ता खर्च में सावधानी ने बिक्री को प्रभावित किया है। डायमंड और प्लैटिनम ज्वेलरी, जो प्रीमियम सेगमेंट में आती हैं, उनमें मांग अपेक्षाकृत स्थिर है, लेकिन वृद्धि बिल्कुल ही नहीं दिख रही। वहीं लैबग्रोन डायमंड ज्वेलरी तेजी से उभरती कैटेगरी है, जो किफायती और टिकाऊ विकल्प के रूप में युवाओं को आकर्षित कर रही है।


गोल्ड एवं सिल्वर ज्वेलरी में वर्तमान गिरावट का एक बड़ा कारण उपभोक्ताओं का निवेश की दिशा में झुकाव है। खरीददार ज्वेलरी की बजाय शुद्ध गोल्ड - सिल्वर खरीदना ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। इसके अलावा शादी - ब्याह जैसे पारंपरिक अवसरों में भी खर्च सीमित हो गया है। भविष्य की बात करें तो यह उद्योग पूरी तरह कमजोर नहीं है, बल्कि ट्रांजिशन के दौर से गुजर रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, कस्टमाइज्ड डिजाइन और ब्रांडेड ज्वेलरी की मांग बढ़ रही है। लैबग्रोन डायमंड और हल्की, डेली वियर ज्वेलरी आने वाले समय में बाजार को नई दिशा देंगे। कुल मिलाकर, मौजूदा मंदी अस्थायी है और कुछ खास किस्म के नए - नए प्रयोग तथा उपभोक्ता व्यवहार में बदलाव के साथ ज्वेलरी सेक्टर फिर से गति पकड़ सकता है। भारत की ज्वेलरी परंपरा और डिजाइन की विविधता के बावजूद कीमतों में अस्थिरता से असमंजस की बात की जाए, तो यह बात तो सही है कि भारत सदियों से ज्वेलरी निर्माण और डिजाइन का वैश्विक केंद्र रहा है। यहां की कारीगरी, क्षेत्रीय डिजाइनों की विविधता और सांस्कृतिक महत्व इसे दुनिया में अलग पहचान देते हैं। राजस्थान की कुंदन, मीना, तमिलनाडु की टेम्पल ज्वेलरी, गुजरात की जड़ाऊ कला जैसी हर ज्वेलरी में, हर क्षेत्र की अपनी खासियत है। यही विविधता भारत को ज्वेलरी डिजाइन का सबसे समृद्ध देश बनाती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में गोल्ड और सिल्वर के दामों में तेजी से उतार - चढ़ाव ने बाजार को असमंजस में डाल दिया है। कभी कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाती हैं, तो कभी अचानक गिरावट आती है। इससे न केवल ग्राहकों का विश्वास प्रभावित होता है, बल्कि ज्वेलर्स के लिए भी स्टॉक मैनेजमेंट चुनौती बन जाता है। गोल्ड जब 1,84,000 हजार से नीचे उतर कर 1,50,000 पर आ जाए और सिल्वर भी 4.5 लाख से गिरकर 2.5 लाख पर आ जाए, तो ऐसे में ग्राहक ज्वेलरी की खरीद का सही समय तय नहीं कर पा रहे हैं। जिससे डिमांड अनिश्चित हो गई है। वहीं ज्वेलर्स को भी मुनाफे की योजना बनाना कठिन हो गया है। 


वैश्विक स्तर पर बदलते हालात के कारण, भारतीय ज्वेलरी की वैश्विक मांग और निर्यात का उतार - चढ़ाव भी दिख रहा है। अमेरिका, मध्यपूर्व, यूरोप और एशिया के कई देशों में भारतीय डिजाइन और कारीगरी की मांग लगातार बनी रहती है। खासकर डायमंड और गोल्ड ज्वेलरी के निर्यात में भारत लंबे समय से अग्रणी रहा है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में निर्यात में उतार - चढ़ाव देखा गया है। अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक भारत का जेम एंड ज्वेलरी निर्यात 27.72 अरब डॉलर रहा। पिछले वित्त वर्ष (28.7 अरब डॉलर) की तुलना में डॉलर के संदर्भ में निर्यात में लगभग 3.32 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे कम है। वैश्विक आर्थिक मंदी, डॉलर की मजबूती, राजनीतिक तनाव और मांग में बदलाव ने निर्यात को प्रभावित किया है। कुछ समय के लिए निर्यात में तेजी आई, लेकिन फिर मांग में नरमी देखने को मिली। केवल मार्च 2026 में, निर्यात में 35.23 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण पश्चिमी एशिया में तनाव और लॉजिस्टिक्स में रुकावट थी। सिल्वर ज्वेलरी के निर्यात में 50 फीसदी से अधिक की जबरदस्त वृद्धि दर्ज हुई है, और लैबग्रोन डायमंड के बढ़ते उपयोग ने पारंपरिक डायमंड निर्यात को भी प्रभावित किया है। हालांकि यह नई श्रेणी निर्यात के लिए एक बड़ा अवसर भी बन रही है। सरकार की नीतियां, जैसे एक्सपोर्ट इंसेंटिव और फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, इस क्षेत्र को सहारा दे रही हैं। भविष्य में भारतीय ज्वेलरी निर्यात का आधार डिज़ाइन इनोवेशन, गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी मूल्य होंगे। यदि उद्योग नई तकनीकों और बदलती वैश्विक मांग के अनुसार खुद को ढाल लेता है, तो भारत अपनी अग्रणी स्थिति को और मजबूत कर सकता है।


ज्वेलरी एग्जीबिशन इस उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म हैं, जहां निर्माता, व्यापारी और खरीदार एक साथ आते हैं। भारत में हर साल कई बड़े और छोटे ज्वेलरी शो आयोजित होते हैं, जो नए डिजाइन, ट्रेंड और टेक्नोलॉजी को सामने लाते हैं। इन एग्जीबिशन के जरिए ज्वेलर्स को नए ग्राहकों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक पहुंच मिलती है। साथ ही, यह नेटवर्किंग और व्यापार विस्तार का बड़ा माध्यम बनते हैं। खासकर छोटे और मध्यम स्तर के ज्वेलर्स के लिए यह अपनी पहचान बनाने का मौका होता है। हाल के वर्षों में डिजिटल और हाइब्रिड एग्जीबिशन का चलन भी बढ़ा है, जिससे भागीदारी आसान हुई है। हालांकि वर्तमान मंदी के कारण कुछ एग्जीबिशन में व्यापारिक गतिविधियां सीमित रही हैं, लेकिन इनकी प्रासंगिकता कम नहीं हुई है। भविष्य में ये प्लेटफॉर्म और अधिक तकनीकी रूप से उन्नत होंगे, जहां वर्चुअल शोकेस, लाइव ऑर्डरिंग और ग्लोबल कनेक्टिविटी प्रमुख भूमिका निभाएंगे। कुल मिलाकर कहें, तो ज्वेलरी एग्जीबिशन उद्योग के विकास और विस्तार के लिए एक मजबूत स्तंभ बने रहेंगे।


मुंबई देश में ज्वेलरी का सबसे बड़ा हब है फिर भी रिटेल ज्वेलर्स अपने बिजनेस पर संकट देख रहे हं। मुंबई से न केवल पूरे भारत, बल्कि दुनिया भर के ज्वेलरी का व्यापार संचालित होता है। यहां थोक और रिटेल दोनों स्तर पर विशाल नेटवर्क है। लेकिन हाल के समय में यहीं के छोटे और मध्यम रिटेल ज्वेलर्स सबसे ज्यादा दबाव में हैं। कम होती मांग, बढ़ती लागत और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की प्रतिस्पर्धा ने उनके व्यापार को प्रभावित किया है। ग्राहकों का झुकाव ब्रांडेड और हल्के डिजाइनों की ओर बढ़ रहा है, जिससे पारंपरिक ज्वेलर्स को नुकसान हो रहा है। ऐसे में छोटे ज्वेलर्स को कुछ बदलाव अपनाने होंगे। उन्हें हल्के और किफायती डिजाइन पर ध्यान देना चाहिए, डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी मौजूदगी बढ़ानी चाहिए और ग्राहक सेवा को बेहतर बनाना चाहिए। क्या ना करें की बात की जाए, तो अनावश्यक स्टॉक जमा करना, केवल पारंपरिक डिजाइन पर निर्भर रहना और कीमतों में पारदर्शिता की कमी। मुंबई जैसे प्रतिस्पर्धी बाजार में टिके रहने के लिए नए नए प्रयोग और परिस्थितियों के अनुरूप ज्वेवरी निर्माण ही सबसे बड़ा हथियार है।


इस दौर की सबसे खाल बात यह है कि लोगों का बुलियन की ओर झुकाव बढ़ा है, और ज्वेलरी की खरीददारी में कमी आने से रिटेल ज्वेलरी के बाजार में गिरावट देखी जा रही है। वर्तमान समय में गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में तेजी और अस्थिरता के कारण उपभोक्ता व्यवहार में बड़ा बदलाव आया है। लोग अब ज्वेलरी खरीदने के बजाय बुलियन यानी शुद्ध सोना चांदी खरीदने में ज्यादा रुचि दिखा रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि बुलियन को निवेश के रूप में ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी माना जाता है। ज्वेलरी में मेकिंग चार्ज और डिजाइन लागत जुड़ जाती है, जिससे उसकी रिसेल वैल्यू कम हो जाती है। इस बदलाव का असर साफ तौर पर ज्वेलरी बाजार में दिखाई दे रहा है, जहां व्यापार में लगभग 18 से 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं बुलियन विक्रेताओं का व्यापार अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है। यह ट्रेंड ज्वेलरी उद्योग के लिए चुनौती है, लेकिन साथ ही संकेत भी कि उन्हें अपनी रणनीति बदलनी होगी। हल्की, कम मेकिंग चार्ज वाली और निवेशफ्रेंडली ज्वेलरी ही भविष्य में ग्राहकों को आकर्षित कर पाएगी।


सही मायने में देखें, तो भारत का ज्वेलरी उद्योग इस समय एक संक्रमणकाल से गुजर रहा है। एक तरफ पारंपरिक मजबूती और वैश्विक पहचान है, तो दूसरी तरफ बदलता उपभोक्ता व्यवहार और बाजार की चुनौतियां। वर्तमान में बिक्री में गिरावट, कीमतों की अस्थिरता और बुलियन की ओर झुकाव जैसे कारक उद्योग को प्रभावित कर रहे हैं। लेकिन यह स्थिति स्थायी नहीं है। भविष्य उन ज्वेलर्स का है जो समय के साथ बदलेंगे—डिजिटल अपनाएंगे, डिजाइन में नवाचार लाएंगे और ग्राहक की जरूरत को समझेंगे। लैबग्रोन डायमंड, हल्की ज्वेलरी और कस्टमाइजेशन इस उद्योग के नए स्तंभ बन सकते हैं। सरकारी नीतियों, निर्यात अवसरों और तकनीकी विकास के साथ यह क्षेत्र फिर से तेजी पकड़ सकता है। अंतत:, भारतीय ज्वेलरी उद्योग की जड़ें इतनी मजबूत हैं कि वह हर चुनौती से उबर सकता है जरूरत है सही दिशा और समय पर बदलाव की।


स्नेह जैन - रॉयल चेन लि.
स्नेह जैन - रॉयल चेन लि.


भारत पारंपरिक रूप से ज्वेलरी निर्माण और डिजाइन का वैश्विक केंद्र रहा है। यहां की विविधता अद्वितीय है, लेकिन गोल्ड और सिल्वर के तेजी से बदलते दामों ने बाजार में असमंजस पैदा कर दिया है। उपभोक्ता खरीद निर्णय टाल रहे हैं, जिससे रिटेल कारोबार प्रभावित हुआ है।






राज कोठारी - मास्टर चेन्स एण्ड ज्वेल्स
राज कोठारी - मास्टर चेन्स एण्ड ज्वेल्स


ज्वेलरी के निर्यात के मोर्चे पर भारत अब भी अग्रणी है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में गोल्ड और सिल्वर में तेजी - मंदी, वैश्विक आर्थिक उतारचढ़ाव, मांग में कमी और राजनीतिक कारणों से निर्यात में कम – ज्यादा होता रहा है। इसके बावजूद ज्वेलरी की अंतरराष्ट्रीय मांग बनी हुई है।






श्रेयांश हरन - राजेन्द्र ज्वेलरी हाऊस
श्रेयांश हरन - राजेन्द्र ज्वेलरी हाऊस



ज्वेलरी बिजनेस के लिए उपभोक्ता ही इस उद्योग की रीढ़ हैं। वर्तमान में ज्वेलरी उपभोक्ता न केवल नए डिजाइन, कम कैरेट और लाइट वेट ज्वेलरी को पसंद कर रहा है, जिसका हमें ख्याल रखना होगा। इसके साथ ही नई जनरेशन की पसंद का भी हर तरह से खयाल रखना होगा।



प्रतिक मुणोत - शंकेश्वर ज्वेलक्राफ्ट एलएलपी
प्रतिक मुणोत - शंकेश्वर ज्वेलक्राफ्ट एलएलपी


मुंबई देश का सबसे बड़ा ज्वेलरी हब है, लेकिन ज्वेलरी सेक्टर में ग्राहकी कम होने के कारण यहां छोटे ज्वेलर्स पर दबाव बढ़ा है। उन्हें स्टॉक कम रखना, डिजिटल प्लेटफॉर्म अपनाना और कस्टमाइज्ड डिजाइन पर ध्यान देना चाहिए, जबकि भारी निवेश और ओवरस्टॉक से बचना जरूरी है।

 
 
 

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