मोदी की अपील का कितना असर होगा ज्वेलरी बिजनेस पर
- Aabhushan Times
- 3 hours ago
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एक साल तक सोना नहीं खरीदने की अपील की है। पीएम मोदी की यह केवल सलाह नहीं है। यह अर्थव्यवस्था का नया राष्ट्रवादी प्रयोग होगा। बड़ा प्रयोग। दूरगामी असर वाला प्रयोग। लेकिन इसका सीधा असर ज्वेलरी के व्यापार पर पडना तय है। ज्वेलर्स पीएम मोदी के अपील के मायने तलाश रहे हैं। चिंता यह है कि कहीं व्यापार पर असर ज्यादा न पड़े। लेकिन एक पहलू यह भी है कि हम हिन्दुस्तानी किसी की सुनते कहां है। पीएम हो या सीएम, अपनी इच्छा के खिलाफ देश किसी की नहीं सुनता। फिर सोना तो सोना है। भारत मेंं सोना सिर्फ मेटल नहीं है। बेटियों की सुरक्षा है। मां का विश्वास भी। लेकिन सच यह भी है कि भारत हर साल अरबों डॉलर का सोना विदेश से खरीदता है। सोना डॉलर से खरीदा जाता है। डॉलर महंगा है, रूपया सस्ता। सोना आएगा, डॉलर जाएगा, तो विदेशी मुद्रा का दबाव बढेगा। हिमारी पूंजी सोने में तब्दील होकर जब तिजोरियों में बंद हो जाती है तो वह निष्क्रिय हो जाती है। पूंजी चलती रहनी चाहिए। तिजोरियों में बंद पड़ी पूंजी किसी काम नहीं आती। पीएम मोदी ने इसीलिए सोने की खरीद से बचने की अपील की है।
साल भर तक सोना ना खरीदने की पीएम मोदी की अपील का सीधा संदेश है कि सोने की चमक छोडि़ए। भारत की आर्थिक ताकत को मजबूत कीजिए। अगर देश ने यह बात मान ली, तो असर बहुत बड़ा होगा। सोने का आयात घटेगा। डॉलर बचेगा। रुपया मजबूत होगा। सरकार के पास निवेश की ताकत बढ़ेगी। यानी तिजोरी का सोना विकास की पूंजी में बदल सकता है। भारत सोना खरीदना बंद करेगा, तो दुनिया भी चौंकेगी। क्योंकि भारत केवल देश नहीं, सोने का सबसे बड़ा ग्राहक है। भारत की खरीद रुकती है, तो दुबई से लेकर लंदन तक हलचल मचती है। स्विट्जरलैंड के गोल्ड कारोबारियों की धडक़नें तेज हो जाती हैं। मोदी कैसे अपील का असर लंबा होना आता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों पर दबाव आ सकता है। दुनिया समझ जाएगी कि भारत अब उपभोग नहीं, आर्थिक अनुशासन की राजनीति कर रहा है। लेकिन सबसे बड़ा संकट ज्वैलरी कारोबार पर आएगा। छोटे ज्वेलर परेशान होंगे। कारीगरों की कमाई ठंडी पड़ सकती हैं। गांवों में महिलाओं का भरोसा डगमगा सकता है। क्योंकि भारत की महिलाओं के लिए सोना गहना नहीं, कठिन समय का साथी होता है।
राजनीति भी गरमाएगी। विपक्ष कहेगा। सरकार अब लोगों की तिजोरी तक पहुंच गई। समर्थक कहेंगे, राष्ट्रहित में त्याग जरूरी है। लेकिन मोदी की राजनीति का सबसे बड़ा कौशल यही है। वे आर्थिक फैसलों को भावनात्मक आंदोलन बना देते हैं। नोटबंदी हो या डिजिटल भुगतान। हर फैसले को उन्होंने राष्ट्रभक्ति का रंग दिया। सोने की खरीद रोकने की अपील भी वैसी ही होगी, एक आर्थिक संदेश। एक राजनीतिक प्रयोग। और आत्मनिर्भर भारत की नई पहल। लेकिन भारत में सोना बाजार में नहीं, संस्कारों में बसता है। इसलिए सोने की खरीद रोकने की अपील को सबके लिए स्वीकारना आसान नहीं होगा। क्योंकि हम उस देश के वासी हैं, जहां बैंकों पर बाद में, लेकिन सोने पर पहले भरोसा करते हैं।











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