गोल्ड: दीपावली तक नई तेजी संभवक्योंकि गोल्ड फिर बन रहा है सबसे सुरक्षित निवेश
- Aabhushan Times
- 4 hours ago
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गोल्ड के रेट्स में हर रोज दिन में कई कई बार उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं, लेकिन अगस्त के जाते जाते यह एक बार फिर 1.50 लाख से ऊपर पहुंच गया है। वैश्विक तनाव के असर के बढऩे के बावजूद दीपावली तक गोल्ड में तेजी की उम्मीद दिख रही है। गोल्ड केवल एक कीमती धातु नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था का सबसे भरोसेमंद सुरक्षा कवच माना जाता है। सदियों से जब-जब दुनिया आर्थिक, राजनीतिक या सैन्य अस्थिरता के दौर से गुजरी है, दुनिया का पहला भरोसा गोल्ड पर ही रहा है। यही कारण है कि आज भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में हलचल बढ़ते ही गोल्ड की मांग मजबूत होने लगती है। भारत में भी गोल्ड निवेश, बचत और परंपरा जैसे तीनों कारण का भारत में आगामी महीनों में त्योहारी सीजन, विशेष रूप से नवरात्रि, दशहरा, धनतेरस और दीपावली, घरेलू मांग को नई ऊर्जा दे सकते हैं। इसके साथ वैवाहिक सीजन को भी देखें, तो उससे भी भारतीय बाजार में गोल्ड को साल दर साल लगातार नया बूस्ट-अप मिलता रहा है। यदि वैश्विक स्तर पर ब्याज दरों में नरमी, डॉलर में कमजोरी या राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो गोल्ड की कीमतों को अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान उतार-चढ़ाव के बावजूद गोल्ड का दीर्घकालिक रुझान अभी भी सकारात्मक बना हुआ है। यही कारण है कि निवेशक और ज्वेलरी उद्योग दोनों दीपावली तक कीमतों में एक नई तेजी की संभावना पर गंभीरता से नजर बनाए हुए हैं।
गोल्ड मार्केट को गहराई से जानने वाले सभी बिजनेसमेन या जानकार अच्छी तरह से जानते हैं कि गोल्ड की कीमतें केवल ज्वेलरी की मांग और आपूर्ति से तय नहीं होतीं, बल्कि उन पर वैश्विक आर्थिक हालात और राजनीतिक तनावों की परिस्थितियों का भी गहरा प्रभाव पड़ता है। जब दुनिया में युद्ध, क्षेत्रीय तनाव, व्यापारिक प्रतिबंध, ऊर्जा का संकट या आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, तब निवेशक शेयर बाजार और जोखिम वाले निवेशों से निकलकर गोल्ड जैसी सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख करते हैं। इजराइल से जुड़े क्षेत्रीय तनाव, अमेरिका की रणनीतिक भागीदारी, मध्य-पूर्व की अस्थिरता तथा वैश्विक व्यापार पर पडऩे वाले संभावित प्रभावों ने समय-समय पर गोल्ड की कीमतों को समर्थन दिया है। जानकार कहते हैं कि अगर ये युद्ध नहीं होता, तो गोल्ड सीधे 1.25 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ सकता था, लेकिन युद्ध के बावजूद गोल्ड 1.40 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम से नीचे नहीं आ सका है। दूसरी ओर, यदि अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है या केंद्रीय बैंक ब्याज दरें ऊंची रखते हैं, तो गोल्ड पर दबाव भी बन सकता है। यही वजह है कि कभी कीमतें तेजी से ऊपर जाती हैं तो कभी मुनाफावसूली के कारण नीचे आ जाती हैं। वर्तमान उतार-चढ़ाव को बाजार के सामान्य चक्र का हिस्सा माना जा रहा है। गोल्ड के निवेशकों का पूरा ध्यान अब इस बात पर है कि आने वाले महीनों में वैश्विक परिस्थितियां किस दिशा में जाती हैं और उनका असर गोल्ड की नई चाल पर कितना पड़ता है। दुनिया के लगभग सभी विकसित और विकासशील देशों के केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा गोल्ड के रूप में रखते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि गोल्ड किसी एक देश की मुद्रा पर निर्भर नहीं होता। यदि किसी देश की करेंसी कमजोर होती है या वैश्विक वित्तीय संकट पैदा होता है, तब भी गोल्ड अपनी ताकत बढ़ाकर बाजार भाव में अपना मूल्य बनाए रखता है। इसीलिए यह दुनिया के किसी भी देश के लिए आर्थिक स्थिरता का मजबूत आधार माना जाता है। इसके अलावा गोल्ड विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने, मुद्रास्फीति के असर को कम करने, वित्तीय जोखिम घटाने और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का विश्वास बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खास कर भारत जैसे देश में गोल्ड लोगों को आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं निवेश जैसी हर तरह से सुरक्षा देने का भी साधन माना जाता रहा है। हम देखते - पढ़ते रहते हैं कि कई देश लगातार गोल्ड खरीदते हैं ताकि वे अपने देश में भविष्य के आर्थिक संकटों से निबट सकें तथा उनके पास मजबूत आर्थिक सुरक्षा कवच मौजूद रहे। यही कारण है कि हाल के वर्षों में अनेक देशों के केंद्रीय बैंकों ने अपने गोलड स्ट़ॉक में उल्लेखनीय वृद्धि की है। इसका एक ही कारण है कि गोल्ड केवल निवेश नहीं, बल्कि किसी भी राष्ट्र की आर्थिक विश्वसनीयता, वित्तीय मजबूती और रणनीतिक सुरक्षा का भी प्रतीक माना जाता है।
वैश्विक बाजार के कई संकेत बताते हैं कि गोल्ड फिर से तेजी कपड़ेगा। इसमें दोबारा मजबूती आने की संभावनाएं इसलिए बनी हुई हैं, क्योंकि हर देश में, इसकी खरीदी की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है। मावना जा रहा है कि यदि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में ब्याज दरों में कटौती का दौर शुरू होता है, डॉलर अपेक्षाकृत कमजोर पड़ता है और केंद्रीय बैंक स्वर्ण खरीद जारी रखते हैं, तो गोल्ड की कीमतों को मजबूत आधार मिल सकता है, जिसकी संभावनाएं बेहद ज्यादा है। इसके अलावा दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आपसी राजनीतिक तनाव, विश्व बैंक के कर्ज का बढ़ता स्तर और हर देश की अपनी आंतरिक आर्थिक अनिश्चितता भी गोल्ड की सुरक्षित निवेश वाली छवि को और मजबूत करती हैं। भारत जैसे बड़े उपभोक्ता बाजार में त्यौहारी और विवाह सीजन के दौरान ज्वेलरी की मांग भी कीमतों को सहारा दे सकती है। गोल्ड इंडस्ट्री के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये सभी कारक एक साथ अनुकूल रहते हैं, तो दीपावली तक गोल्ड अपने पुराने आल टाइम हाई लेवल के करीब पहुंच सकता है या नए रिकॉर्ड भी बनाने का प्रयास करता दिख सकता है। हालांकि बाजार में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव बने रह सकते हैं, लेकिन दीर्घकालिक तस्वीर अभी भी सकारात्मक मानी जा रही है। भारतीय बाजार में गोल्ड की कीमतें अपने सर्वोच्च स्तर से नीचे आने के बाद फिलहाल संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं। लगभग दो महीने तक गोल्ड 1.40 और 1.50 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के बीच ट्रेंड करता रहा, और यह स्थिति कई निवेशकों को खरीदारी का अवसर भी प्रदान करती रही। जून और जुलाई महीने में गोल्ड की कीमतें वास्तव में अपने उच्च स्तर से लगभग 45 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम नीचे रही हैं, इसीलिए गोल्ड इंडस्ट्री के कुछ अंतरराष्ट्रीय विश्लेषणों में चर्चा की जा रही है, और यह संकेत है कि बाजार में सुधार का चरण चल रहा है। इतिहास बताता है कि गोल्ड में तेज गिरावट के बाद अक्सर मजबूत रिकवरी देखने को मिलती है, विशेषकर तब जब घरेलू मांग बढ़ती है और वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल होती हैं। भारत में त्योहारी और विवाह सीजन के दौरान आभूषणों की खरीद पारंपरिक रूप से बढ़ जाती है। इसके साथ यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार से भी सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो कीमतों में अपेक्षाकृत कम समय में फिर से जबरदस्त तेजी देखने को मिल सकती है। इसलिए दुनिया के अनेक गोल्ड विशेषज्ञ इस दौर को लंबी अवधि के लिए अवसर के रूप में भी देखते हैं। वैश्विक गोल्ड उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट्स तथा वर्ल् गोल्ड काउंसिल का का भी मानना है कि वर्तमान उतार-चढ़ाव को दीर्घकालिक कमजोरी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड की बुनियादी मजबूती अभी भी कायम है। केंद्रीय बैंकों की खरीद, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, निवेशकों की सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर बढ़ती रुचि और भारत जैसे देशों में मजबूत उपभोक्ता मांग, ये सभी कारक भविष्य में कीमतों को सहारा दे सकते हैं। उद्योग से जुड़े कई वैश्विक कारोबारी मानते हैं कि त्योहारी सीजन में ज्वेलरी की बिक्री बेहतर रहने की संभावना है, जबकि निवेशक भी गिरावट के दौरान चरणबद्ध खरीदारी को प्राथमिकता दे रहे हैं। एक्सपर्ट्स यह भी सलाह देते हैं कि अल्पकालिक उतार-चढ़ाव से घबराने के बजाय लोगों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। इन एक्सपर्ट्स के अनुसार गोल्ड हमेशा पोर्टफोलियो का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहना चाहिए, क्योंकि यह जोखिम संतुलित करने और आर्थिक अनिश्चितता के समय पूंजी की सुरक्षा प्रदान करता है।
मुख्य बात यह है कि गोल्ड ने पिछले कई दशकों में यह सिद्ध किया है कि वैश्विक संकट, आर्थिक अस्थिरता और बाजार की अनिश्चितताओं के बीच वही सबसे भरोसेमंद परिसंपत्तियों में से एक बना रहता है। अल्पकालिक उतार-चढ़ाव निवेश बाजार का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन गोल्ड की दीर्घकालिक उपयोगिता और विश्वसनीयता पर उनका सीमित प्रभाव पड़ता है। आने वाले महीनों में त्योहारी मांग, वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, केंद्रीय बैंकों की खरीद और भू-राजनीतिक घटनाक्रम गोल्ड की दिशा तय करेंगे। ज्वेलरी उद्योग के लिए यह समय सतर्कता, संतुलित रणनीति और दीर्घकालिक सोच के साथ आगे बढऩे का है। क्योंकि आज भी गोल्ड केवल ज्वेलरी नहीं, बल्कि विश्वास, सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता का सबसे मजबूत प्रतीक माना जाता है। यदि हालात सकारात्मक बने रहते हैं, तो दीपावली तक गोल्ड में नई तेजी देखने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अनिश्चितता, केंद्रीय बैंकों की लगातार गोल्ड खरीद और त्योहारी सीजन की मजबूत मांग को देखते हुए गोल्ड में फिर तेजी की पूरी संभावना है। यदि वैश्विक हालात मौजूदा दिशा में बने रहे, तो दीपावली तक गोल्ड अपने पिछले उच्च स्तर के करीब पहुंच सकता है।

भारत में हर साल दीपावली और विवाह सीजन गोल्ड की मांग को नई ऊंचाई देता है। हाल ही में देश भर से जो ज्वेलर्स एग्जिबिशन में आए थे, उनके मुताबिक भी बाजार सकारात्मक है। रेट में हल्का उतार-चढ़ाव जरूर रहेगा, लेकिन लंबी अवधि का रुझान अभी भी तेजी की ओर संकेत कर रहा है।

आइआइजेएस एग्जिबिशन में हमने देखा है कि गोल्ड की कीमतें केवल घरेलू मांग से नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक संकेतों से भी प्रभावित होती हैं। यदि प्रमुख केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में नरमी अपनाते हैं और डॉलर कमजोर पड़ता है, तो गोल्ड में एक और मजबूत तेजी देखने को मिल सकती है।

गोल्ड की वर्तमान कीमतों को कई निवेशक खरीदारी के अवसर के रूप में देख रहे हैं। सुरक्षित निवेश के रूप में गोल्ड की स्वीकार्यता लगातार बढ़ रही है। मेरा मानना है कि आने वाले महीनों में दीपावली तक निवेश और ज्वेलरी दोनों क्षेत्रों से मांग बढ़ेगी, जिससे गोल्ड की कीमतों को और समर्थन मिलेगा।










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