गोल्ड पर असमंजसरेट ऊपर या नीचे और या फिर लंबा ठहराव?


वर्तमान समय में गोल्ड स्पष्ट रुझान में नहीं है, बल्कि यह असमंजस और सीमित दायरे में चल रहा है, जिसका मुख्य कारण वैश्विक आर्थिक स्थितियां हैं। एक ओर, महंगाई पूरी तरह नियंत्रित नहीं होने के कारण गोल्ड को समर्थन मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर ऊंची ब्याज दरें इस पर दबाव बना रही हैं, जिससे बाजार में ऊपर और नीचे दोनों दिशाओं की ताकतें सक्रिय हैं। निकट अवधि में गोल्ड संभवत: एक निश्चित दायरे में उतार-चढ़ाव के साथ स्थिर रह सकता है, जबकि मध्यम और दीर्घकाल में इसमें तेजी की संभावना बनी हुई है, विशेषकर यदि अमेरीकी ब्याज दरों में कटौती होती है या वैश्विक अस्थिरता बढ़ सकती है। गोल्ड का बाजार भारत में ज्वेलरी पर तो निर्भर है ही, एक बहुत बड़ा वर्ग रेट बढऩे के साथ ही निवेश की दृष्टि से भी गोल्ड को खरीद रहा है। ऐसे में, ग्राहक मानकर चल रहे हैं कि एकमुश्त निवेश करने के बजाय धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से निवेश करना अधिक उचित रहेगा, क्योंकि गोल्ड त्वरित लाभ का साधन नहीं बल्कि दीर्घकालिक सुरक्षा और मूल्य संरक्षण का माध्यम है। इसी वजह से गोल्ड में नरमी के संकेत हैं, तो ईरान - अमेरिका युद्ध थमने के कुछ वक्त के बाद हालात सामान्य होने के बाद इसके फिर से स्थिर होने के संकेत हैं।
गोल्ड अपने ऑलटाइन हाई लेवल की तेजी और फिर से नीचे जाने के बाद वर्तमान के ठहराव की अनिश्चितता के बीच अधरझूल में है। बाजार के जानकारों के विभिन्न विश्लेषण गोल्ड के मामले में वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता पसरती बता रहे हैं। गोल्ड के वैश्विक कुछ जानकार कह रहे हैं कि यह आने वाले समय में अपने ऑल टाइम हाई से भी ऊपर जाएगा। कुछ का कहना है कि कुछ वक्त के लिए गोल्ड नीचे जाएगा और फिर ऊपर की रफ्तार पकड़ेगा। लेकिन कुछ की भविष्यवाणी है कि गोल्ड कहीं नहीं जा सकता, जहां है वहीं बना रहेगा, क्य़ोंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था के हालात अधर में हैं। ऐसे अनिश्चितता हालात के बीच ज्वेलर्स क्या करें, यह और भ्रम की स्थिति है। दुनिया भर के विश्लेषकों के गोल्ड मार्केट पर अध्ययन के अनुसार गोल्ड ऊपर - नीचे की तरफ जाएगा, तो कितना ऊपर - नीचे जा सकता है? कब तक नीचे रहेगा और कब तक ऊपर जा सकता है? इसके अलावा वर्तमान हालात की तरह, गोल्ड अपने वर्तमान स्तर पर स्थिर रहेगा, तो कितने वक्त तक स्थिर रह सकता है?
सबसे पहले बात करते हैं कि वर्तमान के 1.5 लाख के ठहराव से गोल्ड ऊपर की तरफ जाएगा, तो कितना ऊपर जा सकता है? और कब तक ऊपर जाएगा? इस बारे में बात करें, तो गोल्ड के तेजी वाले परिदृश्य का आधार मुख्यत: वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, केंद्रीय बैंकों की खरीद, और ब्याज दरों में संभावित कटौती पर टिका है। यदि वर्तमान युद्ध के बाद अमेरिका में आर्थिक मंदी गहराती है और फेडरल रिज़र्व ब्याज दरों में कटौती शुरू करता है, जिससे गोल्ड की मांग बढ़ सकती है। ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो कम ब्याज दरों के दौर में गोल्ड ने मजबूत प्रदर्शन किया है क्योंकि इसका कोई यील्ड नहीं होता, और कम दरों में इसकी अवसर लागत घटती है। तकनीकी रूप से, यदि गोल्ड अपने पिछले ऑल-टाइम हाई 1.84 लाख प्रति दस ग्राम को पार करता है, तो अगला लक्ष्य रुपए की कमजोरी के साथ बढे रेट में 2 लाख तक भी हो सकता है। इस तेजी में समय सीमा की बात करें तो यह तेजी 6 महीने से 2 साल के भीतर देखी जा सकती है, खासकर यदि वेश्विक स्तर पर विभिन्न देशों के बीच युद्ध और व्यापार संघर्ष जैसे राजनीतिक तनाव बढ़ते हैं। चीन, रूस जैसे देशों द्वारा लगातार गोल्ड खरीद भी इस तेजी को सपोर्ट करती है।
इसके बाद बात करते हैं कि गोल्ड नीचे की तरफ जाएगा, अगर इसकी बात करें, तो फिर यह कितना जाएगा और कब तक नीचे रहेगा? इस मामले में बाजार के जानकार कहते हैं कि गोल्ड के गिरावट वाले परिदृश्य में सबसे बड़ा फैक्टर है मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरें। यदि अमेरिकी अर्थव्यवस्था अपेक्षा से ज्यादा मजबूत रहती है और फेडरल रिजर्व लंबे समय तक दरें ऊंची रखता है, तो निवेशक बॉन्ड और डॉलर की ओर शिफ्ट हो सकते हैं, जिससे गोल्ड पर दबाव आएगा। ऐसी स्थिति में गोल्ड 1.25 लाख प्रति 10 ग्राम के नीचे फिसल सकता है, और 1 लाख तक भी गिरावट संभव है। अगर ऐसा हुआ, तो यह गिरावट आमतौर पर आने वाले 3 से 9 महीने के भीतर हो सकती है, क्योंकि मार्केट सेंटिमेंट तेजी से बदलता है। अगर महंगाई दरें नियंत्रित रहती है और वैश्विक मंदी का खतरा टलता है, तो गोल्ड की डिमांड घट सकती है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी माना जा रहा है कि गोल्ड में गिरावट आमतौर पर सीमित होती है क्योंकि यह एक रक्षात्मक संपत्ति है और बड़ी गिरावट के बावजूद जल्दी खरीदारी वापस आ जाती है।
तीसरे हालात की बात यह हैं कि गोल्ड स्थिर रहेगा और स्थिर रहा, तो कितने समय तक स्थिर रह सकता है? गोल्ड में वर्तमान महीने भर से स्थिरता का बाजार देखा जा रहा है। युद्ध के हालात के बीच गोल्ड स्थिर रहना लोगों को असमंजस में डाले हुए हैं, क्योंकि आमतौर पर दुनिया के किसी भी देश के बीच युद्ध के हालात बनते हैं, तो गोल्ड महंगा हो जाता है। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। वर्तमान हालात यदि बने रहते हैं तो गोल्ड सेफ जोन में रहेगा, जहां गोल्ड न ज्यादा ऊपर जाता है और न ही नीचे। यह स्थिति तब बनती है जब वैश्विक संकेतक मिश्रित होते हैं — जैसे महंगाई भी है, ग्रोथ भी है, और सेंट्रल बैंक भी स्पष्ट दिशा नहीं देते। इस स्थिति में गोल्ड 1.5 लाख प्रति 10 ग्राम के दायरे में अगले 6 महीने से 1.5 साल तक घूम सकता है। भारत में यह दायरा अगर बना रहता है तो, ग्राहकी खुल सकती है। क्योंकि भारत में लोग डेढ़ लाख प्रति दस ग्राम के भाव में गोल्ड को ठीक मानने लग गए हैं। इस दौरान ट्रेडर्स और खरीददीर दोनों ही फायदा उठाते हैं, जबकि लॉग टर्म इन्वेस्टर्स धीरे-धीरे बेचने निकलेंगे। लेकिन जानकारों के मुताबिक यह स्थिरता भविष्य की बड़े अप-डाउन वाली चाल की तैयारी भी हो सकती है। अक्सर लंबे समय तक ठहराव के बाद गोल्ड में तेज ब्रेकअप देखने को मिलता है।
गोल्ड के मामले में वैश्विक हालात बता रहे हैं कि इसकी दिशा पूरी तरह वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक कारकों पर निर्भर है। अमेरिका में ब्याज दरें गिरेंगी तो गोल्ड बढ़ेगा, दरें ऊंची रहेंगी तो दबाव रहेगा। वैश्विक स्तर पर मजबूत डॉलर गोल्ड के लिए नकारात्मक होता है। सभी जानते हैं कि युद्ध, महंगाई, अर्थव्यवस्था के संकट, व्यापारिक अस्थिरता जैसे हालात गोल्ड को सपोर्ट करते हैं। लेकिन केंद्रीय बैंकों की खरीद भी प्रबावित करती रहती है। पिछले कुछ सालों में दुनिया भर के केंद़्रीय बैंकों ने भारी मात्रा में गोल्ड खरीदा है यह यगह लंबी रणनीतिक तेजी संकेत है। इन्हीं सारी वजहों के बीच गोल्ड में वर्तमान में स्थिति अधरझूल की इसलिए भी है क्योंकि ये सभी फैक्टर एक-दूसरे को संतुलित कर रहे हैं। महंगाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई, लेकिन ग्रोथ भी पूरी तरह टूटी नहीं है।
आज के दौर से लंबी अवधि अर्थात 1 से 3 साल की बात की जाए, तो गोल्ड में अभी भी हल्की तेजी रह सकती है, लेकिन शॉर्ट टर्म में उतार - चढ़ाव की अनिश्चितता बनी रहेगी।


गोल्ड में सुधार जारी है। जनवरी की तेजी के बाद नीचे आने के बावजूद गोल्ड की कीमतें 1.5 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम से ऊपर हैं; हालांकि, गोल्ड सेक्टर के वैश्विक रणनीतिकार कह रहे है कि जनवरी 2026 में गोल्ड का ऑल टाइम हाई लेवल आने वाले कुछ सालों के लिए सबसे हाई बना रह सकता है, मतलब कि उससे आगे जाने के चांस नहीं है।


जनवरी का ऑल टाइम हाई लेवल गोल्ड का अब तक का एक खास बैंचमार्क रहा है, और वर्तामान वैश्विक हालात के बीच उसी बैंचमार्क से गोल्ड के रेट्स का आगे जाना ज्यादा आसान हो सकता है, क्योंकि दुनिया का हर देश अपनी अर्थ व्यवस्था सुधारने के लिए गोल्ड को ही निर्धारण मानता रहा है, अत गोल्ड खरीदना ही होगा और उसी से रेट बढ़ेंगे।


जनवरी 2026 में गोल्ड अपने उच्चतम स्तर तक पहुंच गया और 1980 के बाद से अपने 5 साल के मूविंग एवरेज के लिए गोल्ड का सबसे बड़ा प्रीमियम था। यह तेजी, सन 1979 के बाद से सबसे अच्छी तेजी रही है। लेकिन अमेरिका और ईरान के युद्ध के बीच अगर नीचे के संकेत मिलते हैं, तो फिर गोल्ड 1.25 लाख की ओर भी लौट सकता हैं।


अमेरिका का ईरान के साथ चल रहा युद्ध गोल्ड में महत्वपूर्ण अनिश्चितता पैदा कर रहा है। आने वाले दिनों में गोल्ड की कीमतों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि यह संघर्ष कैसे सामने आता है। दोनों देशें को बीच लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष से गोल्ड की कीमतें 5000 डॉलर प्रति औंस से ऊपर भी फिर एक बार जा सकती है।










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