सोने की हॉलमार्किंग फीस में 67 प्रतिशत बढ़ोतरी पर GJC ने जताई आपत्ति
45 से बढ़ाकर 75 प्रति आर्टिकल करने के फैसले की तत्काल समीक्षा की मांग

मुंबई। ऑल इंडिया जेम एंड ज्वेलरी डोमेस्टिक काउंसिल (GJC) ने सोने की हॉलमार्किंग फीस को 45 से बढ़ाकर 75 प्रति आर्टिकल किए जाने पर गंभीर चिंता जताई है। GJC ने केंद्र सरकार और ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) से इस निर्णय की तत्काल समीक्षा करने तथा हितधारकों से व्यापक चर्चा होने तक बढ़ी हुई फीस को रोककर मौजूदा 45 शुल्क जारी रखने की मांग की है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (हॉलमार्किंग) अमेंडमेंट रेगुलेशंस, 2026 के तहत 14 सितंबर 2026 को जारी अधिसूचना में मान्यता प्राप्त अस्सेइंग एंड हॉलमार्किंग सेंटर (AHC) द्वारा सोने के आभूषणों की हॉलमार्किंग के लिए 75 प्रति आर्टिकल शुल्क निर्धारित किया गया है। यह मौजूदा 45 के मुकाबले करीब 67 प्रतिशत की एकमुश्त वृद्धि है।
GJC ने स्पष्ट किया कि उसका विरोध हॉलमार्किंग व्यवस्था से नहीं, बल्कि अनिवार्य अनुपालन की लागत में इतनी बड़ी वृद्धि से है। परिषद का कहना है कि हॉलमार्किंग शुद्धता की गारंटी, पारदर्शिता और उपभोक्ता संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण व्यवस्था है और उद्योग इसका लगातार समर्थन करता रहा है। हालांकि, हॉलमार्किंग का दायरा और वॉल्यूम तेजी से बढऩे के बाद प्रति आर्टिकल शुल्क में इतनी बड़ी वृद्धि के पीछे की लागत संरचना का पारदर्शी अध्ययन होना चाहिए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 1 जुलाई 2021 से 5 मार्च 2026 के बीच 60 करोड़ से अधिक सोने के आर्टिकल पर HUID आधारित हॉलमार्किंग की जा चुकी है। मार्च 2026 तक अनिवार्य हॉलमार्किंग का विस्तार 380 जिलों तक हो चुका था। ऐसे में GJC का मानना है कि बढ़ते वॉल्यूम और क्षमता उपयोग से प्रक्रियाओं में दक्षता तथा अर्थव्यवस्था का लाभ मिलना चाहिए।
फर्जी हॉलमार्किंग और अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई जरूरी
GJC ने कहा कि हॉलमार्किंग व्यवस्था में मौजूद मूल समस्याओं का समाधान केवल शुल्क बढ़ाने से नहीं होगा। परिषद को उद्योग से कुछ स्थानों पर आक्रामक डिस्काउंटिंग, व्यावसायिक प्रोत्साहन और हॉलमार्किंग वॉल्यूम हासिल करने के लिए अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा जैसी शिकायतें मिली हैं। साथ ही, BIS की विभिन्न प्रवर्तन कार्रवाइयों से फर्जी हॉलमार्किंग, अनधिकृत केंद्रों और गैर-अनुपालन के मामले सामने आते रहे हैं। GJC के अनुसार, ऐसे मामलों में निगरानी मजबूत करने, अनधिकृत ऑपरेटरों पर सख्त कार्रवाई करने और वैध HUID के बिना आभूषणों की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। परिषद का कहना है कि नियमों का पालन करने वाले ज्वेलर्स पर शुल्क का अतिरिक्त बोझ डालने के बजाय हॉलमार्किंग व्यवस्था में मौजूद विकृतियों को दूर करना अधिक महत्वपूर्ण है।
हल्के वजन के आभूषणों पर अधिक असर
GJC ने यह भी कहा कि हॉलमार्किंग शुल्क प्रति आर्टिकल लगाया जाता है, उसके वजन के आधार पर नहीं। ऐसे में एक ग्राम के आभूषण और अधिक वजन वाले आभूषण पर समान 75 शुल्क लगेगा। इसका प्रभाव हल्के वजन और कम मूल्य के आभूषणों पर प्रतिशत के लिहाज से अधिक पड़ता है। सोने की कीमतें ऊंचे स्तर पर होने के बीच प्रति आर्टिकल स्थिर अनुपालन लागत बढऩे से इसका प्रभाव मूल्य श्रृंखला के किसी न किसी स्तर पर उपभोक्ता तक पहुंच सकता है।
GJC ने मांगी व्यापक समीक्षा
GJC के चेयरमैन राजेश रोकड़े ने कहा कि उद्योग हॉलमार्किंग का समर्थन करता है, लेकिन अनिवार्य अनुपालन की लागत में करीब 67 प्रतिशत वृद्धि बिना विस्तृत समीक्षा के नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हॉलमार्किंग के वॉल्यूम में भारी वृद्धि हुई है, इसलिए 45 से 75 शुल्क बढ़ाने के कारणों को स्पष्ट किया जाना चाहिए। GJC के वाइस चेयरमैन अविनाश गुप्ता ने कहा कि अनुपालन व्यवस्था व्यावसायिक रूप से टिकाऊ होनी चाहिए। यदि वैध तरीके से काम करने वाले ज्वेलर्स की लागत बढ़ती है और अनधिकृत गतिविधियां जारी रहती हैं, तो दोनों के बीच आर्थिक अंतर बढ़ सकता है।
GJC ने सरकार और BIS से 75 की बढ़ी हुई फीस को समीक्षा पूरी होने तक स्थगित रखने, AHC की वास्तविक लागत और क्षमता उपयोग का पारदर्शी अध्ययन करने, डिस्काउंट व अन्य व्यावसायिक प्रथाओं की जांच करने, फर्जी हॉलमार्किंग के खिलाफ कार्रवाई तेज करने तथा ज्वेलर्स, निर्माताओं और AHC प्रतिनिधियों से परामर्श करने की मांग की है। साथ ही हल्के और कम मूल्य के आभूषणों के लिए अधिक तर्कसंगत शुल्क व्यवस्था पर विचार करने का सुझाव दिया है।
परिषद ने दोहराया कि वह मजबूत और प्रभावी हॉलमार्किंग व्यवस्था के पक्ष में है, लेकिन उसका मानना है कि व्यवस्था की सफलता के लिए अनुपालन किफायती, प्रवर्तन प्रभावी और गैर-अनुपालन आर्थिक रूप से हतोत्साहित करने वाला होना चाहिए।










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