जीजेईपीसी ने इंडिया पवेलियन और इंडिया डिज़ाइन गैलरी के माध्यम से दिखाई भारतीय शिल्पकला और नवाचार की ताकत
- Aabhushan Times
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रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) ने विश्व के प्रतिष्ठित आभूषण व्यापार मेले JCK Las Vegas 2026 में लगातार 21वीं बार भागीदारी कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। 29 मई से 1 जून 2026 तक आयोजित इस प्रदर्शनी में भारत ने अपने इंडिया पवेलियन और इंडिया डिज़ाइन गैलरी के माध्यम से भारतीय शिल्पकला, नवाचार और डिजाइन उत्कृष्टता का भव्य प्रदर्शन किया। करीब 3,900 वर्ग फुट क्षेत्र में फैले इंडिया पवेलियन में भारत के 33 प्रमुख निर्यातकों ने भाग लिया। 'ब्रिलियंट भारतÓ पहल के तहत यह पवेलियन भारत की उस नई पहचान को दर्शाता है, जिसमें देश केवल एक विनिर्माण केंद्र ही नहीं बल्कि वैश्विक डिजाइन और ट्रेंड-सेटर के रूप में भी उभर रहा है।
इंडिया पवेलियन का उद्घाटन लॉस एंजिल्स में भारत के महावाणिज्यदूत डॉ. के. जे. श्रीनिवास ने किया। इस अवसर पर GJEPC के चेयरमेन किरिट भंसाली, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी संयोजक विजय मंगुकिया, पीएमबीडी संयोजक आशीष बोरडा, बैंकिंग, इंश्योरेंस एवं टैक्सेशन समिति के संयोजक मितल दोशी तथा कार्यकारी निदेशक सब्यसाची रे उपस्थित थे। पवेलियन के प्रथम स्तर पर प्राकृतिक हीरे, जड़ाऊ एवं सादे स्वर्ण आभूषणों की उत्कृष्ट श्रृंखला प्रदर्शित की गई, जबकि दूसरे स्तर पर उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक हीरों और विशेष कूट्योर ज्वेलरी कलेक्शन को स्थान दिया गया। इन संग्रहों में भारतीय परंपरा और आधुनिक वैश्विक सौंदर्यशास्त्र का अनूठा संगम देखने को मिला। प्रदर्शनी का एक प्रमुख आकर्षण इंडिया डिज़ाइन गैलरी रही, जिसका विषय 'क्वांटम कूट्योर' रखा गया। विश्व प्रसिद्ध ज्वेलरी ट्रेंड फोरकास्टर पाओला डी लुका द्वारा क्यूरेट की गई इस गैलरी में भारतीय विरासत को आधुनिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया। इसमें एंब्रॉयडरी, माइक्रो पेंटिंग और पोएटिक लेयर्स जैसी Sतीन प्रमुख थीमों पर आधारित विशेष आभूषण प्रदर्शित किए गए। GJEPC के चेयरमेन किरिट भंसाली ने कहा कि दो दशकों से अधिक समय से JCK लास वेगास में भारत की मजबूत उपस्थिति रही है और इस वर्ष का आयोजन भारतीय आभूषण उद्योग के विकास और वैश्विक नेतृत्व का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक नवाचार के समन्वय के माध्यम से दुनिया के पसंदीदा सोर्सिंग गंतव्य के रूप में अपनी स्थिति और मजबूत कर रहा है। भंसाली ने हाल ही में जीईपीसी के नेचुरल डायमंड काउंसिल (NDC) की सदस्यता प्राप्त करने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह कदम प्राकृतिक हीरों के प्रति वैश्विक उपभोक्ताओं के विश्वास और आकर्षण को बढ़ाने के लिए उद्योग के सामूहिक प्रयासों को मजबूती देगा। आज भारत का रत्न एवं आभूषण उद्योग प्राकृतिक हीरे, रंगीन रत्न, स्वर्ण, रजत, प्लैटिनम तथा लैब-ग्रोन डायमंड सहित विभिन्न क्षेत्रों में विश्व के सबसे बड़े और विविधीकृत उद्योगों में शामिल है। कुशल कारीगरों, आधुनिक विनिर्माण क्षमताओं और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला के बल पर भारत वैश्विक ब्रांडों और खुदरा विक्रेताओं के लिए एक विश्वसनीय सोर्सिंग हब बन चुका है। जीईपीसी विश्व डायमंड काउंसिल, वल्र्ड फेडरेशन ऑफ डायमंड बोर्सेस और किम्बरली प्रोसेस जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी के माध्यम से पारदर्शिता, नैतिक स्रोतों और सतत विकास को बढ़ावा दे रहा है। साथ ही परिषद हांगकांग, लास वेगास, इटली, दुबई, जापान, जर्मनी, सऊदी अरब और ब्राजील सहित दुनिया के प्रमुख बाजारों में भारतीय निर्यातकों के लिए नए व्यापारिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर रही है।













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