top of page

झटकों से जूझता गोल्ड

  • Aabhushan Times
  • 23 hours ago
  • 7 min read

वैश्विक संकटों और इंपोर्ट ड्यूटी के दोहरे बोझ से मुश्किल में भारतीय ज्वेलरी बिजनेस

आमतौर पर जब दुनिया में हालात खराब होते हैं, तो लोग गोल्ड को सबसे सुरक्षित निवेश मानकर इसमें पैसा लगाते हैं, जिससे इसके दाम बढ़ते हैं। लेकिन मौजूदा समय में बाजार का रुख थोड़ा अलग और मिला-जुला है। वर्ष 2026 में गोल्ड का वैश्विक और घरेलू परिदृश्य अभूतपूर्व उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। भारतीय सर्राफा मार्केट इस समय तेजी से घटते-बढ़ते रेट्स और कमजोर ग्राहकी के बीच आगामी त्योहारी सीजन से आस लगाए बैठा है। लेकिन गोल्ड की वैश्विक मार्केट का रिसर्च करने वाले जानकारों की राय में, आने वाले साल में गोल्ड तेजी में ही दिख रहा है। क्योंकि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अमेरिकी डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए लगातार भारी मात्रा में गोल्ड खरीदकर अपने रिजर्व में रख रहे हैं। जेपी मॉर्गन की रिसर्च विंग के अनुसार, वैश्विक अस्थिरता और केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी के कारण सोना आने वाले समय में 6,000 यूएस डॉलर प्रति औंस के स्तर को छू सकता है। इस लिहाज से भारतीय बाजारों में इसके 2 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने के आसार हैं। 

वैश्विक परिदृश्य को देखें, तो जियोपॉलिटिकल हालात, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रेट्स और ट्रंप टैरिफ का त्रिकोण गोल्ड को मुश्किल में डाले हुए हैं। इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड की चाल इस समय कई वैश्विक शक्तियों और आर्थिक फैसलों के चक्रव्यूह में फंसी हुई है। युद्ध के हालात और हॉर्मुज संकट सबसे अहम है। पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी युद्ध और हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंधों के खतरों ने कच्चे तेल की कीमतों के साथ-साथ सुरक्षित निवेश के रूप में गोल्ड की मांग को चरम पर पहुंचा दिया है। जनवरी 2026 में इंटरनेशनल मार्केट में गोल्ड करीब $5,600 प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक छू गया था। फेडरल रिजर्व की ब्याज दरें और अमेरिकी डॉलर भी एक अहम पहलू है। अमेरिकी डॉलर में मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती को टालने (या उम्मीद से कम कटौती करने) के रवैये ने गोल्ड के रेट्स में भारी उतार-चढ़ाव पैदा किया है। उच्च ब्याज दरों के कारण वैश्विक स्तर पर निवेशक बॉन्ड जैसे फिक्स्ड-इनकम एसेट्स की तरफ आकर्षित हो रहे हैं, जिससे गोल्ड की कीमतों पर दबाव भी देखा जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ रवैया इस मामले मं मबत्वपूर्ण कारण है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वैश्विक व्यापार पर भारी टैरिफ लगाने के आक्रामक रुख ने वैश्विक व्यापारिक युद्ध की आशंकाओं को जन्म दिया है, जिससे वैश्विक मुद्राएं कमजोर हो रही हैं और गोल्ड को दीर्घकालिक मजबूती मिल रही है।

गोल्ड के वर्तमान उतार चढ़ाव के बीच सबसे अहम एक जो बात और भी है, वह है - केंद्रीय बैंकों की अंधाधुंध खरीदारी और निवेशकों का बदलता रुख। दुनिया भर के रिजर्व बैंकों की गोल्ड की भूख सदा से मजबूत रही है। क्योंकि उनको अपने अपने देश की अर्थव्यवस्था को सहारा देते रहने के लिए और अपना रिजर्व बैंलेंस बनाना होता है। दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों सहित रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना आदि अपनी विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियों को सुरक्षित करने के लिए लगातार गोल्ड की खरीदारी कर रहे हैं। इस संस्थागत मांग के कारण गोल्ड के रेट्स ऊंचे स्तरों पर टिके हुए हैं। निवेशकों की कमाई में कमी और बदलता ट्रेंड भी एक खास कारण है। निवेशकों को जहां पिछले सालों में गोल्ड ने बंपर रिटर्न दिया, वहीं 2026 में कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव और हालिया गिरावट के कारण नए निवेशकों की तात्कालिक कमाई में कमी आई है। गोल्ड के मार्केट विश्लेषकों के अनुसार, भारत में गोल्ड खरीदना अब 15 प्रतिशत ड्यूटी लोडिंग के कारण काफी महंगा हो गया है। परिणामस्वरूप, निवेशक अब फिजिकल गोल्ड के बजाय गोल्ड ईटीएफ को प्राथमिकता दे रहे हैं। भारत सरकार द्वारा इंपोर्ट ड्यूटी 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी की गई, तो गोल्ड का बड़ा झटका लगा। भारतीय ज्वेलरी और गोल्ड मार्केट के लिए सबसे बड़ा शॉक 13 मई 2026 को लगा, जब वित्त मंत्रालय ने एक बड़ा नीतिगत यू-टर्न लेते हुए गोल्ड पर प्रभावी आयात शुल्क को 6 फीसदी से बढ़ाकर सीधे 15फीसदी कर दिया। इसमें 10 फीसदी बेसिक कस्टम ड्यूटी और 5 फीसदी कृषि सेस एवं विकास उपकर शामिल है। सरकार का यह कदम वित्त वर्ष 2026 में रिकॉर्ड 71.98 बिलियन यूएसडॉलर के गोल्ड इंपोर्ट बिल के कारण घटते विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने और रुपये को मजबूती देने के लिए उठाया गया है। लेकिन देश के गोल्ड बिजनेस और ज्वेलरी मार्केट पर इसका तत्काल असर देखा गया। इस फैसले के तुरंत बाद घरेलू मार्केट में गोल्ड के भाव आसमान छूने लगे और पुराने स्टॉक की री-प्राइसिंग कर दी गई। जून 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की औसत कीमत 1,45,000 से 1,57,000 प्रति 10 ग्राम के बीच रही, जो कि पिछले साल के मुकाबले लगभग डबल ऊंची पर है।

भारतीय ज्वेलरी बिजनेस में झटका साफ देखा जा रहा है। ग्राहकी के हालात लगभग ठप से है और ज्वेलर्स मुशिक्ल में। इंपोर्ट ड्यूटी में इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी और रिकॉर्ड तोड़ कीमतों ने घरेलू ज्वेलरी बिजनेस को भारी नुकसान पहुंचाया है। इसलिए ज्वेलरी की ग्राहकी में भारी गिरावट देखी गई है। ज्वेलर्स एसोसिएशन तथा ज्वेलरी मार्केट संगठनों के अनुसार, आसमान छूते गोल्ड के भावों के कारण आम ग्राहकों ने रिटेल ज्वेलरी खरीद के मामले में स्टोर से दूरी बना ली है। रोज़मर्रा की खरीदारी और शादियों के लिए होने वाली सामान्य बुकिंग में 30 फीसदी से 40 फीसदी तक की गिरावट देखी जा रही है। इंपोर्ट ड्यूटी में इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी से गोल्ड की तस्करी) को बढ़ावा मिलनाय तय है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल जैसी गोल्ड सेक्टर की इंटरनेशनल संस्थाओं के विशेषज्ञों का मानना है कि इंपोर्ट ड्यूटी को 15 फीसदी तक बढ़ाने से गोल्ड के आधिकारिक और अनौपचारिक व्यापार के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है, जिससे गोल्ड की अवैध तस्करी और कैश की खरीदी जैसे ग्रे मार्केट को दोबारा संजीवनी मिल सकती है। इससे गोल्ड की इंपोर्ट मांग में गिरावट का अनुमान है। अनुमान है कि उच्च कीमतों और टैक्स के चलते वर्ष 2026 में भारत में ज्वेलरी, बार और सिक्कों की कुल मांग में 50 से 60 टन की भारी गिरावट दर्ज की जा सकती है। ये गिरावट पिछले साल के मुकाबले लगभग 10 फीसदी मानी जा रही है।  आगामी त्योहारी सीजन से ज्वेलर्स की उम्मीदों की डोर बंधी हैं, लेकिन उसमें भी कई तरह की और चुनौतियां सामने खड़ी है। भारतीय संस्कृति में गोल्ड केवल एक धातु नहीं बल्कि समृद्धि का प्रतीक है। ज्वेलरी व्यवसाय के लिए वर्ष की दूसरी छमाही में विशेषकर रक्षाबंधन, धनतेरस, दीपावली और उसके बाद आने वाला शादियों का सीजन सबसे महत्वपूर्ण है।  हमारे भारतीय समाज की गोल्ड को लेकर लालसा बेहद अहम रही है। इसी कारण चाहे कितने भी रेट बढते रहें, लोगों की तरफ से गोल्ड की खरीदी होती ही है, भले ही थोड़ी कम बिक्री हो जाए, लेकिन मार्केट खत्म नहीं होगा। पिछले तीन सालों के आंकड़े देखें, और 24 गोल्ड की औसत कीमतों के साथ ज्वेलरी बिजनेस का रुखदेखें, तो उत्साहजनक हालात ही दिखते हैं। वर्ष 2024 में गोल्ड की कीमतें 64,000 रुपए पर स्थिर थीं और मार्केट में बिक्री का रुख भी सकारात्मक था। सन 2025 में गोल्ड बीस हजार के आसपास बढक़र 83,000 के पास पहुंचा फिर भी मार्केट में रिकॉर्ड बिक्री थी। इसके बाद सन 2026 के शुरूआत को तीन महीनो में गोल्ड़ ने जब तेजी पकड़ी और 1,85,000 के ऑलटाइम हाई पर पहुंचा, फिर भी गोल्ड में ग्राहकी जारी रही। लेकिन बाद के तीन महीनों में गोल्ड़ जब 1.57 लाख से लेकर वर्तमान में 1.45 लाख के बीच चल रहा है, तो अनिश्चितता का माहौल माना जा रहा है और कारोबार बेहद मंदा दिख रहा है। लेकिन कुल मिलाकर देखा जाए, तो पिछले 2 साल में गोल्ड अपने निवेशकों को आज डबल से भी ज्यादा कमाई दे चुका है। 

 कारोबारियों की रणनीति ज्वेलर्स इस त्योहारी सीजन में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए मेकिंग चार्जेस पर भारी छूट, लाइटवेट ज्वेलरी के नए डिजाइंस और पुराने गोल्ड के बदले नए गोल्ड के एक्सचेंज ऑफर्स पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। व्यापारियों को उम्मीद है कि भारतीय परिवारों में शादियों और त्योहारों पर गोल्ड खरीदने की अनिवार्य परंपरा के चलते, लोग भले ही मात्रा (वजन) कम खरीदें, लेकिन मार्केट में लौटेंगे जरूर। कुल मिलाकर, वर्तमान में गोल्ड इंटरनेशनल भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू सख्त टैक्स नीति के दो पाटों के बीच पिस रहा है। जहां एक तरफ वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण इंटरनेशनल स्तर पर गोल्ड का बुनियादी ढांचा मजबूत है, वहीं भारत में 15 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी के कारण स्थानीय खुदरा मार्केट पूरी तरह सहमा हुआ है। त्यौहारी सीजन ही अब यह तय करेगा कि भारतीय ज्वेलरी बिजनेस इस भारी-भरकम कीमत और टैक्स के झटके से उबर पाता है या उसे इस साल मंदी का सामना करना पड़ेगा।


पोपटलाल संघवी - पायल गोल्ड प्रा. लि.

वैश्विक स्तर पर गोल्ड की कीमतों में तेजी, दुनिया में राजनीतिक तनाव और निवेशकों की सुरक्षित निवेश की मांग ने बाजार को प्रभावित किया। ऊंचे दामों के कारण कुछ समय तक ग्राहकी कमजोर रही, लेकिन अब शादी-ब्याह और त्योहारी सीजन के चलते ग्राहकों की वापसी हो रही है। बाजार में धीरे-धीरे फिर से रौनक लौटती दिखाई दे रही है।


अमित सोनी - एमएल कन्हैयालाल ज्वेल्स.

पिछले कुछ महीनों में रिकॉर्ड ऊंचे गोल्ड के भाव के कारण भारतीय बाजारों में ग्राहकों ने खरीदारी टाल दी थी। हालांकि अब भी लोग अपनी जरूरत और निवेश की अतिरिक्त कोशिश दोनों को ध्यान में रखकर खरीदारी कर रहे हैं। हल्के वजन की ज्लवेलरी की मांग बढ़ी है, जिससे भारतीय ज्वेलरी बाजार फिर से गति पकड़ता नजर आ रहा है।

दिनेश जैन - समृद्धि ज्वेल क्राफ्ट अंतरराष्ट्रीय मार्केट में आर्थिक अनिश्चितता और लगभग हर देश के केंद्रीय बैंकों की गोल्ड की खरीद ने वैश्विक कीमतों को मजबूत बनाए रखा है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है और रिटेल मांग कुछ समय के लिए धीमी हुई दिख रही है। अब फिर से कीमतों में स्थिरता आने और उपभोक्ता विश्वास बढऩे से कारोबार में सुधार देखने को मिल रहा है।

किरण लोढ़ा - वियरा सीझेड ज्वेलरी

भारतीय गोल्ड ज्वेलरी उद्योग ने ऊंची कीमतों के कारण अस्थायी मंदी का सामना किया, लेकिन यह मांग पूरी तरह खत्म नहीं हुई बल्कि कुछ वक्त के लिए टली गई थी। अब विवाह, त्योहार और निवेश की बढ़ती रुचि के साथ बाजार फिर से संतुलित हो रहा है तथा आने वाले महीनों में ग्राहकी एक बार फिर से मजबूत होने की संभावना है।


 
 
 

Comments


Top Stories

Bring Jewellery news straight to your inbox. Sign up for our daily Updates.

Thanks for subscribing!

  • Instagram
  • Facebook

© 2035 by Aabhushan Times. Powered and secured by Mayra Enterprise

bottom of page